चंडीगढ़ थिएटर फेस्टिवल में शिरकत करने आए रंगमंच के 3 सितारों आसिफ, जहीर और राकेश बेदी ने अभिनय के बारे और अपने रंगमंच के सफर के बारे में बताया।
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आसिफ शेख
- फोटो : amar ujala
भाभीजी घर पर हैं फेम आसिफ शेख ने बताया कि रंगमंच एक ऐसी जगह है जहां कलाकार को अपनी प्रतिभा का पता चलता है। आज बहुत से कलाकार थिएटर के बाद छोटे और बड़े पर्दे पर जाते हैं और सफल भी रहते हैं। छोटे पर्दे के जाने माने कलाकार आसिफ शेख शुक्रवार को सिटी में एक नाटक के मंचन के लिए मौजूद थे। इस दौरान यूटी गेस्ट हाउस में संक्षिप्त वार्ता में उन्होंने बताया कि वह शहर में पहले भी कई बार प्ले कर चुके हैं, लेकिन उस समय लोगों ने कभी नोटिस नहीं किया। अब छोटे पर्दे पर आने वाले सीरियल ‘भाभी जी घर पर हैं’ के चर्चित होने के बाद लोग उन्हें भी पहचानने लगे हैं। उनके अनुसार आज के समय में थिएटर में सफल होने के लिए जरूरी है कि कॉमेडी की जाए। इसे लोग उसे याद भी रखते हैं।
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रंगमंच के अभिनेता एसएम जहीर
- फोटो : amar ujala
चंडीगढ़ थिएटर फेस्टिवल में शिरकत करने आए एसएम जहीर ने कहा कि एक्टिंग का शौक उन्हें बचपन से था, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि एक दिन इसे ही जीने और जीविका का साधन बना लूंगा। उनके अनुसार दिल्ली आने के बाद एक थिएटर ग्रुप से जुड़ा और उसके बाद रंगमंच की दुनिया में प्रवेश हुआ। उस समय हर उम्र और हर तरह के किरदार निभाए। इसके बाद बस आगे ही आगे बढ़ते चले गए। जहीर के अनुसार सीमाओं में रहकर जो काम किया जाता है उसकी हमेशा सराहना होती है। उनके अनुसार आज के युवा कलाकार समय और काम की कद्र नहीं करते। इससे उनके काम की भी सराहना बुलबुले जैसी होती है जो बस चंद समय के लिए दिखती है और उसके बाद गुम हो जाती है।
बॉलीवुड के हास्य कलाकारों में शुमार राकेश बेदी का कहना है कि वह पंजाबी थिएटर में आना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए बस वह एक बेहतर समय का इंतजार कर रहे हैं। उनके अनुसार पंजाबी एक ऐसी भाषा है जिसके हर शब्द में हंसी है, लेकिन उसमें एक बेहतर संदेश होना जरूरी है। शुक्रवार को थिएटर फेस्टिवल के लिए चंडीगढ़ आए राकेश बेदी ने कहा कि थिएटर को दर्शक दिखावा मानते हैं, लेकिन सही मायने में यह समाज का आइना है। आज थिएटर में जो पेश किया जाता है वह समाज का ही प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन आज के कलाकारों का मानना है कि अब ह्यूमर ही चलता है मगर वो भूल जाते हैं कि ह्यूमर में सार्थकता के साथ-साथ सच्चाई को भी दिखाना पड़ता है। वहीं लेखन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी लेखक बिना कारण के कुछ नहीं सोच नहीं सकता। वैसे भी आज के समय में वहीं चलता और बिकता है, जिसे समाज पसंद करता है।