नहर की पटरी पर दौड़कर मिल्खा सिंह का रिकॉर्ड तोड़ने वाले धर्मबीर सिंह ने डोप टेस्ट मामले में पहली बार बातचीत की और बड़ा ऐलान कर सभी को चौंका दिया।
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हरियाणा जिले के भारतीय धावक धर्मबीर सिंह का प्रोफाइल
- फोटो : फाइल फोटो
धर्मबीर सिंह कहते हैं कि उनका सपना ओलंपिक में पदक जीतने का था। इसे साकार करने के लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत की और क्वालिफाइ किया, लेकिन डोप टेस्ट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हालांकि मेरे पास एक और मौका है, लेकिन अगर वे रियो ओलंपिक नहीं जा पाए तो दौड़ना छोड़कर गांव में खेती बाड़ी करुंगा।
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Dharambir
- फोटो : Getty
धर्मबीर कहते हैं कि ओलंपिक में जाने का उनका सपना अब नाडा के फैसले पर निर्भर करेगा। अगर वे इस बार रियो नहीं जाते है तो भविष्य में उनका ओलंपिक जाना संभव नहीं होगा। डोप टेस्ट पॉजीटिव आने से उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है। वहीं, मामले को लेकर शुक्रवार को नाडा की चार सदस्यीय टीम के सामने अपना पक्ष रखा। मामले में शनिवार को फैसला सुनाया जाएगा।
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स्प्रिंटर धर्मबीर सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
धर्मबीर ने जिला परिषद के चेयरमैन बलराज कुंडू के साथ उन्होंने नाडा के डीजी से मुलाकात कर अपील पर जल्द सुनवाई की मांग रखी थी। दरअसल, डोप टेस्ट के बाद धर्मबीर के ओलंपिक में जाने की उम्मीद खत्म हो गई थी, लेकिन इस मामले में कुंडू ने हस्तक्षेप किया और वे बुधवार को धर्मबीर को लेकर भाजपा के हरियाणा प्रदेश प्रभारी अनिल जैन व महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मिले थे। उन्होंने इस मामले में केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल व नाडा के डीजी राजीव अग्रवाल से सिफारिश की।
बता दें कि 200 मीटर रेस में भारत को 36 साल बाद ओलंपिक का टिकट दिलाने वाले धर्मबीर रोहतक के अजायब गांव के रहने वाले हैं। ओलंपिक में धर्मबीर को उसैन बोल्ट के साथ दौड़ना था, लेकिन डोप टेस्ट में फंसने से पूरा परिवार सकते में है। धर्मबीर के ब्लड सैंपल पॉजिटिव पाए जाने की बात परिजनों के गले नहीं उतर रही है। परिवार का कहना है कि हमने इस दिन के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। अब बेटा ऐसे मुकाम पर पहुंचकर चूक नहीं कर सकता। धर्मबीर को साजिश का शिकार बनाया जा रहा है।