सेहत बनानी हो या वजन कम करना है, हेमंत ऋतु से ज्यादा अच्छा और बेहतर समय कोई हो ही नहीं सकता, तो कुछ नुस्खे अपनाकर इस मौसम का फायदा उठाएं।
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धूप में गर्मी और रात में ठंडक। यह इशारा हेमंत ऋतु का होता है। हल्की गुलाबी ठंड को हेमंत ऋतु कहा जाता है। नवंबर व दिसंबर सुहाने एवं लुभावने मध्यम ठंडे मौसम के लिए जाने जाते हैं। कहा जाता है कि यदि किसी को सेहत बनानी हो या वजन कम करना हो तो इससे बढ़िया दूसरा कोई मौसम नहीं होता। दरअसल, इस मौसम में शरीर के अंदर एंजाइम की प्रोडक्शन बढ़िया होती है, जो खाने को पचाने में मददगार साबित होती है। आयुर्वेद में हेमंत ऋतु को सेहत बनाने की ऋतु भी कहते हैं। इसमें जैसा चाहे, वैसा शरीर बना सकते हैं। आज आयुर्वेद के जरिए जानेंगे कि इस बेहतरीन मौसम का आनंद कैसे उठाया जाए।
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हेमंत ऋतु के संकेत
वातावरण में धुंध, धुआं और धूल हो
रातें लंबी होती हैं। मछली व जलचर पक्षी छिप जाते हैं
नदियों के जल से भाप निकलती है
कुएं का जल गर्म हो जाता है
रातें लंबी होने के कारण सुबह के वक्त भूख लगती है
शरीर की बढ़ी हुई अग्नि भोजन पचाने में मदद करती है।
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स्वस्थ लोग भोजन में इन्हें शामिल करें
इस मौसम में हरी सब्जियां खूब आती हैं। सरसों, सोया मेथी, पालक, बथुआ और हरा प्याज। रोज इनमें से किसी एक सब्जी का प्रयोग जरूर करें। आयुर्वेद के मुताबिक, इस मौसम में आप मीठे और तेल का सेवन कर सकते हैं। पाचन शक्ति अच्छी होने की वजह से खाना अच्छी तरह से पचता है। अपने भोजन में भारी खाना जैसे घी, मक्खन, दही, मलाई, रबड़ी, गुड़, गन्ने का रस, तिल, उड़द, खजूर, नया चावल, चीनी, मिश्री, मिठाई, शहर, मौसमी फल, बादाम, पिस्ता, गर्म दूध व अखरोट को शामिल कर सकते हैं लेकिन इस बात का ध्यान रखना होगा कि किसी भी चीज की अति न करें। एक्सरसाइज जरूर करें।
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इस मौसम में बीमार होने के कारण
- ठंडे भोजन का सेवन करना
- कुछ गरम खाने के बाद तुरंत ठंडा खा लेना
- शरीर में लगने वाली ठंड हवा का बचाव न करना
- पौष्टिक भोजन का सेवन न करना
- वायरल इंफेक्शन का होना
- सर्दी से ग्रसित अन्य व्यक्तियों के संपर्क में आना
- धूल व आसपास की वस्तु से एलर्जी होना
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इन रोगियों को इस मौसम में रखना होगा ख्याल
हार्ट रोगी: ठंड में नसें सिकुड़ती हैं। इससे हार्ट रोगियों को हार्ट का खतरा बढ़ता है। ऐसे में रोगियों को अपने डाक्टर से निरंतर संपर्क में रहना होगा। उनसे यह जरूर पूछें कि इस मौसम में एक्सरसाइज कब करनी है। तेल, घी, नमक और चीनी संतुलित लें। ठंडे पानी के स्थान पर गुनगुने पानी का उपयोग करें और इसी से नहाएं।
अर्थराइटिस: ठंड में जोड़ों के दर्द के मरीजों की संख्या में इजाफा होता है। ऐसे मरीजों को विटामिन डी, कैल्शियम का विशेष तौर पर ध्यान रखना होगा। खाने में कैल्शियम से भरपूर चीजें खाएं। व्यायाम, धूप सेवन, मालिश, गुनगुने पानी से नहाने या जोड़ों को गर्म पानी से सिकाई करने पर परेशानी कम होती है। ज्यादा दर्द होने पर डाक्टर को दिखाएं।
स्किन में रूखापन: ठंडी हवाओं की वजह से पूरे शरीर में रूखापन रहता है। कई बार लोग ज्यादा पानी नहाने से भी स्किन में रूखापन आता है। इससे बचने के लिए गुनगुने पानी से नहाएं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। नहाने के बाद शरीर पर माइश्चर क्रीम लगाएं। ज्यादा रूखापन होने पर डाक्टर को दिखाएं।
अस्थमा: सांस के रोगी ठंड एवं धुंध में बाहर जाने से बचें। ताजा गर्म एवं हल्का भोजन करें। ठंडी व खट्टी चीजों से बचें। थोड़ा व्यायाम प्रतिदिन अवश्य करें। दमे के दौरे से बचने हेतु इनहेलर का उपयोग करें। प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में अपने डाक्टर से जरूर मिले।
डायबिटीज: जैसा कि बताया गया था कि इस मौसम में खाना जल्दी पचता है। ऐसे में लोग ज्यादा खाना खाते हैं। इससे रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ती है। ब्लड शुगर अनियंत्रित होने लगता है, जो पीड़ित के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसलिए डाइट का विशेष ध्यान रखें। शुगर चेक करते रहें। तीन महीने वाला एचबीएवनसी शुगर टेस्ट भी करवा डाक्टर को दिखाएं।
यह ऋतु ऐसी है, जिसमें वजन बढ़ा या कम कर सकते हैं। इस मौसम में घी और मक्खन का सेवन करें। हरी सब्जियां और मौसमी फल भी खाएं। इस मौसम का आनंद उठाना चाहिए। दिसंबर तक यह ऋतु रहती है। - ईश्वर चंद वैद्य, वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक नग्गल