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सैल्यूटः किसी को लगी गोली किसी के साथ हादसा, अब पैरालंपिक में देश का बढ़ाएंगे मान

Wed, 13 Nov 2019 05:15 PM IST
ajay kumar अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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अगर इंसान का हौसला बुलंद हो तो वो सबकुछ कर सकता है। मुश्किल से मुश्किल घड़ी से निपट सकता है। कहानी ऐसे ही छह युवाओं की जिन्होंने हर बाधा को मात दी और अब दुनिया में परचम फहराने को तैयार हैं। इनकी कहानी आम लोगों से जरा हटकर है। प्रेरणादायक है। ये सभी छह युवा हरियाणा के हैं। आइए पढ़ते हैं इनके बारे में...
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इनमें से किसी को फौज में गोली लगने से शरीर ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया तो किसी को हादसे ने व्हीलचेयर पर बैठा दिया। लेकिन इन सभी युवाओं ने हिम्मत नहीं हारी और अपने हौसले के सहारे ही खेलों में आगे बढ़कर देश को पैरा ओलंपिक का टिकट दिला दिया। इन छह खिलाड़ियों ने दुबई में चल रही वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बेहतर प्रदर्शन करके टोक्यो पैरा ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया है। इनमें रोहतक के दो खिलाड़ियों के अलावा सोनीपत, हिसार, झज्जर व गुरुग्राम से एक-एक खिलाड़ी शामिल हैं। वहीं हरियाणा के एक खिलाड़ी टेकचंद की चुनौती बाकी है और उनसे भी बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।
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विनोद कुमार। - फोटो : अमर उजाला
1- रोहतक के रहने वाले विनोद कुमार एक फौजी थे लेकिन देश सुरक्षा करते हुए उनको गोली लग गई। गोली से उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लगी, जिससे शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। विनोद को घर में आराम करते रहना अच्छा नहीं लगा तो खेलना शुरू कर दिया और डिस्कस थ्रो के खिलाड़ी बन गए। विनोद ने डिस्कस थ्रो एफ-52 में चौथे स्थान पर रहकर टोक्यो पैरा ओलंपिक में जगह पक्की कर ली और अब विनोद देश के लिए पैरा ओलंपिक में खेलेंगे।

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एकता भयान। - फोटो : अमर उजाला
2- हिसार की रहने वाली एकता भयान का 2003 में एक्सीडेंट को गया था, जिसमें उनके दोनों पैरों ने चोट के कारण काम करना बंद कर दिया था। इससे एकता व्हीलचेयर पर पहुंच गईं। एकता ने चार साल पहले ही खेलना शुरू किया और वह रोजगार अधिकारी के पद पर कार्यरत होते हुए नियमित प्रैक्टिस करती रहीं। इसका ही नतीजा है कि क्लब थ्रो एफ-51 में पैरा ओलंपिक के लिए अपनी जगह पक्की कर ली। एकता का पैरा ओलंपिक में खेलना सपना था।
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योगेश कथूनिया।
3- झज्जर के रहने वाले योगेश कथूनिया को बचपन में चोट लगने के कारण दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। लेकिन योगेश ने हिम्मत नहीं हारी और वह खेलने लगे। योगेश ने पिछले साल पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता तो अब वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो एफ-56 में ब्रांज मेडल जीतने के साथ ही पैरा ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया।
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रिंकू हुड्डा। - फोटो : अमर उजाला
4- रोहतक के रहने वाले रिंकू हुड्डा ने 4 साल की उम्र में अपना एक हाथ गंवा दिया था। रिंकू ने अर्जुन अवार्डी अमित सरोहा को देखकर खेलने की इच्छा जताई और उनको अपना गुरु बना लिया। जिसके बाद रिंकू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और रियो पैरा ओलंपिक में पहली बार जगह बनाई। उसके बाद रिंकू ने कई मेडल जीते और अब जैवलिन थ्रो एफ-46 में चौथे स्थान पर रहकर टोक्यो पैरा ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया।
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संदीप। - फोटो : अमर उजाला
5- गुरुग्राम के रहने वाले संदीप चौधरी ने 12 साल की उम्र में एक हादसे में पैर गंवा दिए थे। उसके बाद भी संदीप ने हौसला नहीं खोया और उन्होंने खेलना शुरू कर दिया। संदीप ने रियो पैरा ओलंपिक का टिकट भी लिया था, लेकिन वहां मेडल से चूक गए थे। अब वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में संदीप ने जैवलिन थ्रो एफ-64 में गोल्ड मेडल जीतकर दूसरी बार पैरा ओलंपिक में जगह बनाई है।
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सुमित। - फोटो : अमर उजाला
6- सोनीपत के रहने वाले सुमित का चार साल पहले दुर्घटना के कारण पैर काटना पड़ा था। सुमित मायूस रहने लगा तो उसका जीजा वीरेंद्र ने हौसला बढ़ाया और वह भी अपने जीजा की तरह खेलों में आगे आ गया। सुमित ने जैवलिन थ्रो एफ-64 में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर टोक्यो पैरा ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया है।
हरियाणा के पैरा एथलीट लगातार बेहतर प्रदर्शन करके आगे बढ़ रहे हैं और वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के सहारे अभी तक छह खिलाड़ियों ने टोक्यो पैरा ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया है। -गिरिराज सिंह, महासचिव पैरा एथलेटिक्स एसोसिएशन
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