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हरियाणा निकाय चुनाव : शक्तिरानी बनीं अंबाला की पहली महिला मेयर, भाजपा की हार की वजह भी जान लें

Thu, 31 Dec 2020 02:38 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला (हरियाणा)
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शक्तिरानी शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
सात साल बाद अंबाला में हुए नगर निगम चुनाव में पूर्व मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी शक्तिरानी शर्मा 8084 वोट से जीतकर पहली महिला मेयर बन गई। शक्तिरानी ने भाजपा की वंदना शर्मा को हराया। शक्तिरानी को कुल 37604 वोट मिले। सुबह करीब सवा आठ बजे गिनती शुरू हुई और पहले राउंड के परिणाम सुबह नौ बजे आए तो शक्तिरानी ने 700 से ज्यादा वोटों से बढ़त बनाई। 
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अंबाला में शक्तिरानी शर्मा की जीत के बाद जश्न मनाते लोग। - फोटो : अमर उजाला
पांचवें राउंड तक शक्तिरानी ने बढ़त बनाए रखी लेकिन छठे राउंड में वंदना शर्मा ने 47 वोट से बढ़त बना ली। छठे राउंड के बाद एक भी वार्ड में वंदना शर्मा नहीं जीत पाई। चुनाव में भाजपा के सबसे ज्यादा आठ पार्षद जीते। हरियाणा जनचेतना पार्टी के सात, कांग्रेस के तीन और हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट के दो पार्षद जीते हैं। 
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- फोटो : अमर उजाला
अब अविश्वास प्रस्ताव भी नहीं ला पाएगी भाजपा 
हरियाणा जनचेतना पार्टी की मेयर शक्तिरानी शर्मा के साथ उनकी पार्टी के सात पार्षद वार्ड नंबर एक से जसबीर सिंह, वार्ड नंबर दो फकीरचंद, वार्ड नंबर 11 से राजेंद्र कौर, वार्ड 12 से अमनदीप कौर, वार्ड नंबर 17 राणो देवी, वार्ड 18 से सरधूल सिंह और वार्ड नंबर 19 से राकेश कुमार पार्टी के पार्षद बने हैं। भाजपा के मात्र आठ ही पार्षद हैं। शेष पांच पार्षद कांग्रेस या उससे टूटकर बनी पार्टी के हैं ऐसे में वह किसी भी हाल में भाजपा का समर्थन नहीं कर सकते। 

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- फोटो : अमर उजाला
क्यों हारी भाजपा
केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद अंबाला में भाजपा की शहरी सरकार नहीं बन सकी। इसका मुख्य कारण पार्टी में भितरघात तो रहा ही। साथ ही किसान आंदोलन भी हार का कारण बना। जहां भी भाजपा के दिग्गज गए किसानों ने काले झंडे दिखाकर विरोध किया। अंबाला नगर निगम में हाल ही में 12 गांव निगम में शामिल हुए थे। इतना ही नहीं नौ गांव इससे पहले शामिल किए गए थे। इन सभी गांवों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
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Haryana - फोटो : अमर उजाला
भाजपा की मेयर पद प्रत्याशी शहर से नहीं जुड़ी हुई थी। डॉ. वंदना शर्मा गांव नन्यौला की रहने वाली हैं और उन्हें भाजपा ने शहर में चुनाव लड़ाने के लिए आखिरी समय में मैदान में उतार दिया। उनका वोट भी चुनाव से कुछ दिन पहले नगर निगम क्षेत्र में बनवाया गया। अंबाला नगर निगम में जनता भ्रष्टाचार, कूड़ा नहीं उठने और एनओसी नहीं मिलने से बेहद परेशान थी। ऐसे में जनता ने निगम चुनाव में भाजपा के खिलाफ वोट कर अपना रोष जताया। 
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Haryana - फोटो : अमर उजाला
शहरी क्षेत्र में कम मतदान भी भाजपा की हार का कारण बना। अग्रवाल समाज और आढ़तियों की नाराजगी भी हार का कारण बना। मुख्यमंत्री मनोहर लाल पूर्व जिलाध्यक्ष जगमोहन लाल की पत्नी को टिकट देने के पक्ष में थे जबकि ओपी धनखड़ आखिरी समय तक डॉ. वंदना शर्मा के पक्ष में डटे रहे। यही कारण रहा कि 20 में से आठ पार्षद जीतने के बावजूद भाजपा की मेयर पद प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।
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