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संगरूर उपचुनाव: AAP की हार के पांच बड़े कारण, 100 दिन पहले जीती थी यहीं की नौ विधानसभा सीटें, अब अपना गढ़ भी नहीं बचा सके

Sun, 26 Jun 2022 09:14 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
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अरविंद केजरीवाल व भगवंत मान। (फाइल फोटो) - फोटो : @BhagwantMann
महज 100 दिन पहले आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में बंपर जीत हासिल की थी। खासकर संगरूर, जो पंजाब के सीएम भगवंत मान का क्षेत्र है, वहां के नौ विधानसभा हलकों  में आप को चार लाख वोटों की लीड मिली थी और अब लोकसभा उपचुनावों में पार्टी हार गई है। वहां से सिमरनजीत सिंह मान जीत गए हैं। जमीनी स्तर पर 100 दिन में हालात ऐसे बदले कि सुनाम जहां से आप के अमन अरोड़ा 75 हजार मतों से जीते थे, उनके विधानसभा हलके में आप को महज 1483 मतों की लीड मिली। संगरूर लोकसभा सीट भगवंत मान की पक्की मानी जाती रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश में आप ने एक ही लोकसभा सीट जीती थी, वह थी संगरूर की। संगरूर के वोटरों ने लोकसभा से आप को खत्म कर दिया है।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। - फोटो : अमर उजाला
संगरूर लोकसभा क्षेत्र में नौ विधानसभा हलके आते हैं, जिसमें संगरूर शहरी, दिबड़ा, बरनाला, भदौड़, मलेरकोटला, धूरी, महिल कलां, लहरागागा, सुनाम शामिल हैं। ये हलके आप का गढ़ माने जाते हैं। धूरी तो भगवंत मान का खुद का विधानसभा हलका है, जहां से वह 58 हजार 206 मतों से जीतकर पंजाब के सीएम बने लेकिन अब वहां आप की लीड 12 हजार रह गई है। आम आदमी पार्टी ने महज 100 दिन के भीतर अपने चार लाख वोटर संगरूर लोकसभा क्षेत्र से गंवा दिए हैं। 

पहला कारण
पार्टी की हार का मुख्य कारण पंजाब में गैंगस्टरों का हावी होना है, इस कारण भारी संख्या में युवाओं ने आप से किनारा कर लिया है। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा में कटौती करना फिर प्रचार कर वाहवाही लूटना और अगले ही दिन सिद्धू मूसेवाला की हत्या की वारदात ने पंजाब के युवाओं में आक्रोश पैदा कर दिया है। पंजाब से लेकर कनाडा तक पंजाबी मूल के लोग रोष में आ गए, जिसका नतीजा हुआ कि पार्टी का एक बड़ा वोट बैंक टूट गया। कबड्डी खिलाड़ी संदीप नंगल अंबिया समेत कई युवा गैंगस्टरों का शिकार बने। इसके बाद पंजाब में आप के प्रति लोगों का विश्वास काफी गिरता जा रहा था।
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भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दूसरा कारण
पंजाब में दिल्ली सरकार की दखलंदाजी है। हाल ही में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल व भगवंत मान के रोड शो का फोटो वायरल हुआ, जिसमें भगवंत मान एक सिक्योरिटी गार्ड के साथ अरविंद केजरीवाल की गाड़ी पर लटके थे, जिससे सोशल मीडिया पर सीएम मान की काफी किरकिरी हुई और पंजाब में यह संदेश गया कि भगवंत मान की सरकार को दिल्ली से चलाया जा रहा है।

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पंजाब के सीएम भगवंत मान - फोटो : एएनआई (फाइल फोटो)
तीसरा कारण
गायक सिद्धू मूसेवाला का एक ऑडियो वायरल हुआ। इसमें वह सिमरनजीत सिंह मान को कहते हैं कि बापू मैं तैनूं मिलना आना है... पंजाब के भारी संख्या में युवा सिद्धू मूसेवाला को अपना आइकॉन मानते हैं। अंतिम संस्कार में उमड़ी युवाओं की भीड़ ने दिखा दिया था कि उनके जेहन में सिद्धू मूसेवाला के लिए प्यार है। युवाओं ने खुलकर मूसेवाला के कारण सिमरनजीत सिंह मान को वोट किया।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चौथा कारण
पंजाब के अहम मुद्दे ड्रग व बेअदबी की घटनाओं पर सरकार का एक भी एक्शन नहीं हुआ है। वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल मीडिया को संबोधित करते हुए कहते हैं कि मेरे साथ कुंवर विजय प्रताप खड़े हैं। इनकी रिपोर्ट सीएम चन्नी की टेबल पर है, उसमें दोषियों के नाम हैं, उनको पकड़कर अंदर करो। यह काम 24 घंटे का है। हमारी सरकार आई तो सबसे पहले बेअदबी के दोषियों को अंदर किया जाएगा। 100 दिन में बेअदबी की घटनाओं के दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई है।
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पंजाब के सीएम भगवंत मान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पांचवां कारण
पंजाब के पंथक वोटरों व अमन पसंद लोगों ने कुंवर विजय प्रताप के कारण आप को काफी वोट दिया था। पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति काफी खराब है और ऐसे में सरकार बनते ही कयास लगाए जा रहे थे कि अमन अरोड़ा, बीबी बलजिंदर कौर, कुंवर विजय प्रताप कैबिनेट का हिस्सा होंगे और कुंवर को गृह विभाग दिया जा सकता है लेकिन इन तीनों को दूर रखा गया। खासकर पंजाब में गैंगस्टरों की ओर से लगातार की जा रही हत्याओं के बाद आवाज उठने लगी थी कि गृह विभाग कुंवर विजय प्रताप को सौंपा जाए लेकिन उनको स्थान नहीं दिया गया।
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