देखिए देश में एक ऐसा महाराज, जिनके दुनिया भर में लाखों फॉलोअर्स हैं। वे पिछले 3 साल से समाधि में हैं, पर क्लीनिकली डेड हैं। जानिए इनके बारे में सब कुछ।
विज्ञापन
2 of 15
आशुतोष महाराज
हम बात कर रहे हैं पंजाब में जालंधर में नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज की। इनके समाधि में रहने को लेकर विवाद चल रहा था, जो हाईकोर्ट तक पहुंचा। याचिका में आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार किए जाने की मांग की गई, लेकिन डेरा और उनके भक्तों को यकीं है कि वे समाधि से लौट आएंगे। अब हाईकोर्ट ने भी मामले में उनके भक्तों के हक में फैसला सुना दिया है।
विज्ञापन
3 of 15
आशुतोष महाराज
मामले में जस्टिस महेश ग्रोवर की खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए सिंगल बेंच के आदेशों को खारिज करते हुए आशुतोष महाराज के शरीर को संरक्षित करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि आशुतोष महाराज के शरीर को किसी भी प्रकार का नुकसान ना हो इसके लिए लगातार डीएमसी की मेडिकल टीम उनके शरीर की जांच हेतु जाती रहेंगी।
4 of 15
आशुतोष महाराज
- फोटो : file photo
हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि उनके शरीर की मेडिकल जांच के लिए डेरे को भुगतान करना होगा। इस भुगतान के लिये हाईकोर्ट ने 50 लाख के तौर पर एफडी के रूप में जमा रखने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आशुतोष महाराज की कथित पुत्र दिलीप कुमार झा की डीएनए टेस्ट को लेकर दाखिल की गई याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।
विज्ञापन
5 of 15
आशुतोष महाराज
डीएनए टेस्ट की मांग पर हाईकोर्ट ने दिलीप कुमार झा को कहा कि वो चाहे तो इसके लिए सिविल सूट दाखिल कर सकते हैं और सिविल सूट दाखिल करने की स्थिति में यदि आशुतोष महाराज के DNA के सैंपल लेने की आवश्यकता पड़ी तो डेरे को निर्देश दिए गए हैं कि सैंपल लेने में किसी भी तरह के रोक टोक न की जाए।
विज्ञापन
6 of 15
आशुतोष महाराज
जालंधर के नूरमहल कस्बे में स्थित आश्रम में 28 जनवरी 2014 को दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष जी महाराज समाधिलीन हो गए थे। चिकित्सकों ने 29 जनवरी 2014 को उन्हें क्लीनिकल डेड घोषित कर दिया था, लेकिन उनके अनुयायी नहीं माने। उनके भक्तों ने उन्हें समाधिरत घोषित कर दिया।
विज्ञापन
7 of 15
आशुतोष महाराज
आशुतोष महाराज का शरीर डेरा भवन में एक चेंबर में फ्रिजर में रखा है। चौबीस घंटे दो अनुयायी निगरानी में रहते हैं। चालीस पुलिस कर्मचारी चौबीसों घंटे डेरा भवन में प्रवेश वाले रास्ते पर तैनात रहते हैं। संस्थान के प्रवक्ता विशालानन्द का कहना है कि वे अंतहीन समय तक उनकी समाधि टूटने का इंतजार करेंगे।
8 of 15
आशुतोष महाराज
वहीं, समाधि को लेकर उनके ड्राइवर पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट में अपील की कि महाराज की मौत हो चुकी है, लेकिन आश्रम के प्रबंधक उनको समाधि में बता रहे हैं। याचिका में कहा गया कि गद्दी और 1 हजार करोड़ की जायदाद की वजह से उनके मृत शरीर की बेअदबी हो रही है। अब उनके बेटे होने का दावा करने वाले दिलीप झा ने भी खुद को उनका वारिस बनाने और अंतिम संस्कार करने की मांग की है, जिस पर सुनवाई चल रही थी।
9 of 15
आशुतोष महाराज
जानकारी के मुताबिक, आशुतोष महाराज को महेश झा और वेदप्रवक्तानंद के नाम से भी जाना जाता है। वे मूल रूप से दरभंगा के लखनौर गांव के रहने वाले हैं और उनके बेटे का नाम दलीप झा है। अमर उजाला के पास उनके पासपोर्ट की कॉपी है, जिसका नंबर जे-691673 है। यह पासपोर्ट दिल्ली से जारी हुआ है। इसमें महेश कुमार को एक प्रचारक बताया गया है।
10 of 15
आशुतोष महाराज
पासपोर्ट में लिखा है कि महेश कमार को वेदप्रवक्तानंद के नाम से भी जाना जाता है। पासपोर्ट के मुताबिक, उनका जन्म 6 अगस्त 1946 को हुआ। इसमें उनका पता 2-12 पंजाबी बाग न्यू दिल्ली दर्ज है। पिता का नाम देव आनंद और मां का नाम मातेश्वरी बताया गया है। भाइयों की संख्या छह व बहनों की संख्या तीन लिखी हुई है।
11 of 15
आशुतोष महाराज
जानकारी के मुताबिक, 1971 से मार्च 1973 तक महेश झा ने सतपाल महाराज के पास पंजाबी बाग डेरे में उनके शिष्य के तौर पर ज्ञान दीक्षा ली, तब उन्होंने आश्रम को अपना पूरा विवरण भरकर दिया। इसमें खुद को सीएम कॉलेज, दरभंगा से दर्शन शास्त्र, संस्कृत में मास्टर डिग्री लिखी हुई है। अप्रैल 1973 में महेश झा भगवा वस्त्र में दिखे और नाम साधु वेदप्रवक्तानंद रख लिया।
12 of 15
आशुतोष महाराज
3 नवम्बर 1973 को महेश कुमार उर्फ वेदप्रवक्तानंद के नाम से सरकार ने उन्हें पासपोर्ट जारी कर दिया। 6 नवम्बर 1973 को वे आध्यात्मिक प्रचार के लिए अमेरिका पहुंचे। 22 जनवरी 1974 को प्रचार के लिए इंग्लैंड पहुंचे, लेकिन चरित्र दोष के कारण उन्हें वापिस बुला लिया गया और आश्रम ने उसे भगवा वस्त्र भी उतरवा लिए। साथ ही सजा सुना दी।
13 of 15
आशुतोष महाराज
फिर वे हरिद्वार प्रेमनगर आश्रम में सादे वस्त्रों में सेवादार बन गए। वहां उन्होंने नागा सेवादार के साथ मिटटी ढोने और संस्था की मासिक पत्रिकाओं की फोल्डिंग और पैकेजिंग का काम किया। 1975 में सजा पूरी होने के बाद माफी मांगने के बाद भगवा वस्त्र मिले और साधु बनकर दिल्ली स्थित आश्रम में रहने लगे। 1976 में वे महात्मा रामअलबेलानंद(जो अब आजमगढ़ यूपी में हैं)के साथ मुम्बई आश्रम में आ गए।
14 of 15
आशुतोष महाराज
1977-78 वे बिहार के सहरसा, दुमका व पटना में रहे और धर्म प्रचार किया। 1979 में देहरादून, मुरादनगर व साहिबाद में महात्मा आशानंद(जो अब कन्नौज मध्यप्रदेश में हैं) के साथ रहे। 1980 में उन्हें शिमला से लखनऊ भेज दिया गया। 1981 में उन्हें पटियाला भेजा गया। पटियाला से प्रचार के लिए अंबाला और कुरूक्षेत्र भी गए।
1982-83 में उन्हें कोलकत्ता भेजा गया। अप्रैल 1983 को बैसाखी पर्व पर कोलकत्ता से हरिद्वार आ गए। वहां से वापिस कोलकाता न जाकर पटियाला आ गए और यहां नूरमहल में रहने लगे। यहीं पर उन्होंने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की स्थापना की। देखते ही देखते वे वेदप्रवक्तानंद से आशुतोष महाराज बन गए और देश विदेश में उनके लाखों फॉलोअर्स हो गए।