मृतक छात्र के परिजन।
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रविंदर की मौसी नीलम ने बताया कि वह, रविंदर की मां मनप्रीत कौर, चाचा ओम प्रकाश, चाची रमनदीप कौर और दादा ज्ञानी पाल सिंह को साथ लेकर सच्चाई जानने स्कूल गए थे। प्रिंसिपल गुरदीप सिंह ने उन्हें सांत्वना देने के बजाय धमकाना शुरू कर दिया। उसने कहा कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जो करना है कर लो। जहां जाकर शिकायत करनी है कर लो। रविंदर की छोटी बहन जसकरन कौर भी उसी स्कूल में 10वीं की छात्रा है। वह इतना डर गई है कि स्कूल नहीं जाना चाहती।
पीड़ित परिवार ने बताया कि रविंदर के पिता गुरमीत सिंह और दादी की मौत भी कुछ समय पहले हुई थी। परिवार इन दो मौतों के दुख से उबरा भी नहीं था कि रविंदर ने खुदकुशी कर ली। सब इतने सदमे में थे कि किसी को पुलिस में शिकायत करने की बात नहीं सूझी, जिसने जो कहा वे करते चले गए। उन्हें डराया भी जाता रहा, खुदकुशी नोट भी सरपंच जगदेव सिंह ने अपने पास रख लिया। हालांकि उन्होंने खुदकुशी नोट की फोटो खींच कर बतौर सुबूत फोन में रख लिया था।