जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे, सरकार में मंत्री रहे, इमरजेंसी के वक्त जेल भी गए। कुछ ऐसा था छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलराम दास टंडन का जीवन, 10 अनकहे तथ्य।
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बलराम दास टंडन
14 अगस्त को देहांत हो गया
पंजाब सरकर में कैबिनेट मंत्री रह चुके छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन का मंगलवार दिनांक 14 अगस्त 2018 की दोपहर को बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे। सीने में बैचेनी की शिकायत के बाद उन्हें रायपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था, जहां मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
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बलराम दास टंडन
अमृतसर में जन्म हुआ था
बलराम दास टंडन का जन्म एक नवंबर 1927 को पंजाब के अमृतसर में रूपलाल टंडन के घर में हुआ। टंडन ने अमृतसर के चौक पासियां की एक तंग गली में स्थित पैतृक घर में राजनीति का ककहरा सीखा और राजभवन तक का सफर तय किया। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वे निरन्तर सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
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बलराम दास टंडन
छात्र जीवन में खेलों से नाता
अपने छात्र जीवन में राज्यपाल बलरामदास टंडन कुश्ती, वॉलीबॉल, तैराकी और कबड्डी के सक्रिय खिलाड़ी रहे थे। अपने सियासी सफर के दौरान भी वे छह बार विधायक रहे और पंजाब सरकार में मंत्री भी रहे। टंडन ने 18 जुलाई 2014 को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का पद संभाला था।
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बलराम दास टंडन
जनसंघ के संस्थापक सदस्य
टंडन 1951 में जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे। 1953 में पहली बार अमृतसर नगर निगम के पार्षद बने। फिर अमृतसर विधानसभा क्षेत्र से 1957, 1962, 1967, 1969 एवं 1977 में विधायक चुने गए। 1975 से 1977 तक आपातकाल के दौरान वे जेल में भी रहे।
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बलराम दास टंडन
पंजाब में उपमुख्यमंत्री रहे
1951 से 1957 तक पंजाब जनसंघ के सचिव और 1995-97 से पंजाब भाजपा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। बलराम दास टंडन 1969-70 के दौरान अकाली दल-जन संघ मंत्रालय में पंजाब के उपमुख्यमंत्री थे। 1979 से 1980 के दौरान वे पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे।
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बलराम दास टंडन
बढ़ा हुआ वेतन लेने से इंकार किया था
साल 1997 में टंडन राजपुरा सीट से चुनाव जीत कर पंजाब में मंत्री बने। अब जुलाई 2014 से वे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल थे। पिछले दिनों उन्होंने बढ़ा हुआ वेतन लेने से इनकार कर दिया था, उनके इस कदम की सभी ने तारीफ की थी।
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बलराम दास टंडन
संघ प्रचार करने चंबा गए थे
टंडन के बारे में कहा जाता है कि 1950-51 में बलराम दास टंडन संघ का प्रचार करने के लिए हिमाचल प्रदेश के चंबा गए हुए थे। रात को उन्हें संदेश दिया गया कि वह जल्द डलहौजी पहुंचें, जहां संघ के प्रचारकों की बैठक है। टंडन रात को ही 35 किलोमीटर के सफर पर पैदल निकल पड़े और सुबह डलहौजी पहुंच गए।
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बलराम दास टंडन
हिमाचल में गिरफ्तार हुए थे
1953 में भारतीय जनसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने के लिए विरोध-प्रदर्शन शुरू किया था। तब टंडन को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। टंडन धर्मशाला की यौल जेल में बंद कर दिए गए थे। इसी बीच अमृतसर म्युनिसिपल कमेटी के चुनावों की घोषणा हुई। टंडन ने भी नामांकन पत्र भरकर भेजा और जीत दर्ज की।
फुटबाल खेलते हुए टूट गया था घुटना
राजनीतिक पारी का आगाज करते हुए टंडन जब रिहा हुए तो उन्होंने अमृतसर में भारतीय जनसंघ को मजबूत किया। आपातकाल के समय उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। जेल में फुटबाल खेलते हुए उनका घुटना टूट गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उन्हें पैरोल पर रिहा होने की सलाह दी, लेकिन टंडन नहीं माने। आपातकालीन समाप्त होने के बाद 1977 में फिर चुनाव लड़ा, जीते और प्रकाश सिंह बादल सरकार में मंत्री बने।