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Pics: आग की लपटों से घिरी थी वैन, बहादुर बेटी ने जान पर खेल चार को बचाया, सीएम भी हुए मुरीद

Sun, 16 Feb 2020 08:20 PM IST
ajay kumar वरिन्दर राणा, अमर उजाला, गांव अमर सिंह पिंडी (लौंगोवाल)
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पंजाब सरकार जलती स्कूल वैन से चार बच्चों को बचाने पर 14 वर्षीय अमनदीप कौर को सम्मानित करेगी। मुख्यमंत्री जल्द ही इस बहादुर बच्ची से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रविवार को ट्वीट कर अमनदीप कौर की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा- मैं 14 साल की अमनदीप कौर की असाधारण बहादुरी और वीरता को सलाम करता हूं, जिन्होंने स्कूल वैन में आग लगने पर अपनी जान जोखिम में डाल दी और वैन से 4 बच्चों को बचाया। कैप्टन ने अमनदीप को संबोधित करते हुए लिखा -मुझे तुम पर गर्व है और मैं तुमसे मिलने के लिए उत्सुक हूं। आइए पढ़ते हैं इस बेटी की बहादुरी की मिसाल...
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 स्कूल वैन में आग लगने से चार बच्चों के जिंदा जलने की घटना के बाद उनके गांव अमर सिंह पिंडी में रविवार को सन्नाटा पसरा रहा। हर कोई हादसे की निंदा कर रहा था। वहीं 14 वर्षीय अमनदीप कौर की बहादुरी की भी दाद दे रहा था। नौवीं कक्षा की छात्रा अमनदीप कौर भी उसी बर्निंग वैन में सवार थी। उसने जब देखा कि वैन के दरवाजे लॉक हो गए हैं तो वैन में पड़े एक औजार से शीशा तोड़ दिया और बाहर निकल गई। वैन से दूर भागने की बजाय उस ने अपने साथ बैठे चार मासूम बच्चों को भी बाहर निकाला। उसे इस बात का मलाल है कि वह जिंदा जल गए चार बच्चों को बाहर निकालने में कामयाब नहीं हो सकी। यह बच्चों उसके घर के पास ही रहते थे।
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चारों मासूमों का आज हुआ अंतिम संस्कार।
अमनदीप कौर के परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद वह रात भर सो नहीं सकी है। अमनदीप कौर ने अमर उजाला को बताया कि पहले वह स्कूल ऑटो से जाती थी। यह सुविधा स्कूल की तरफ से मुहैया करवाई गई थी। शुक्रवार से ऑटो की जगह एक वैन भेजना शुरू किया गया। शनिवार दोपहर को छुट्टी के बाद जब वह वैन में पहुंची तो उसे स्कूल के म्यूजिक टीचर चला रहे थे। पहले उसका मन हुआ कि वह वैन की अगली सीट पर बैठ जाए लेकिन वह पिछली सीट पर बैठी। वैन में बाकी बच्चे भी बैठ रहे थे लेकिन वैन से पेट्रोल की गंध आ रही थी। इस दौरान वैन में कुल 12 बच्चे सवार हो गए। जैसे वैन स्कूल परिसर से बाहर निकली उसमें अजीब सी आवाज आने लगी। वैन अभी 300 मीटर दूर ही पहुंची होगी कि पीछे आ रहे ट्रैक्टर चालक ने शोर मचाना शुरू कर दिया। वह सभी वैन के अंदर बैठे थे इसलिए किसी को कुछ सुनाई नहीं दिया।

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अचानक एक अन्य व्यक्ति ने जब जोर से आवाज दी तो वैन चालक ने उसे एक साइड पर रोक दिया। वैन चालक ने कहा कि वह सभी अंदर बैठे वह देखता है कि क्या हुआ है। चालक अभी बाहर ही निकला था कि वैन से धुआं निकलने लगा। चालक ने फटाफट वैन की अगली सीट पर बैठे बच्चों को निकालना शुरू कर दिया। मौत को सामने देख उसे वैन में एक औजार पड़ा दिखाई दिया। उसकी सहायता से वैन का पिछला शीशी तोड़ा और बाहर निकल गई। उसकी साथ की सीट पर नर्सरी कक्षा के बच्चे बैठे थे जो चिल्ला रहे थे। उसने किसी तरह चार बच्चों को बाहर निकाल लिया। उस समय सड़क से गुजर रहे अन्य लोग भी आगे बुझाने में जुट गई। वह उन बच्चों को लेकर स्कूल की तरफ चली गई। देर शाम उसे पता चला कि उसके पड़ोस में रहने वाले तीन बच्चे उस वैन में जिंदा जल गए हैं।
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‘काश उन चारों बच्चों को हमारी बेटी बचा लेती’
सतनाम सिंह ने बताया कि अमनदीप कौर उनकी इकलौती बेटी है। स्कूल जाने के लिए कई बार स्कूटी ले जाने की जिद करती है। डर के कारण वह उसे स्कूटी चलाने के लिए नहीं देते हैं। वह पहले स्कूल ऑटो से जाती थी इसलिए उन्होंने प्रिंसिपल से कहा था कि ऑटो की जगह किसी अन्य साधन की व्यवस्था करे। स्कूल प्रबंधक चंद पैसे बचाने की खातिर खटारा वैन ले आए। जैसे ही उन्हें दोपहर को पता चला कि स्कूल वैन में आग लग गई है वह बदहवास मौके पर दौड़े। उनकी पत्नी भी घर को छोड़ मौके पर भागी। वहां बेटी को न देख एक बार तो उन्हें लगा कि शायद सब कुछ खाक हो गया है। कुछ समय बाद जब उन्होंने बेटी को स्कूल को मं देखा तो कुछ राहत की सांस ली। जिन चार बच्चों की मौत हुई है वह सभी हमारे पड़ोसी है। काश हमारी बेटी उन बच्चों को बचाने में भी कामयाब रहती।
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बहन की मौत से अंजान सतगुर अकेला
हादसे में गांव अमर सिंह पिंडी (लौंगोवाल) वासी सतगुर शनिवार को अपनी बड़ी बहन कमलप्रीत कौर के साथ स्कूल गया था। दोपहर बाद वह अपनी बहन कमलप्रीत के साथ उसी वैन में घर के लिए निकला था जो रास्ते में बच्चों के लिए काल बन गई। हादसे में उसकी बहन कमलप्रीत की मौत हो गई। संयोग से सतगुर अमनदीप के साथ बैठा था। वैन से बाहर निकलने के बाद अमनदीप ने सबसे पहले उसे ही बाहर निकाला था। रविवार को सतगुर स्कूल की ड्रेस में अपना स्कूटर चला रहा था। उसे नहीं पता था कि शनिवार को हुए हादसे में उसकी बहन उसे हमेशा के लिए छोड़कर जा चुकी है।
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हादसे में जान गंवाने वाले चारों मासूम।
आराध्या का स्कूल में था पहला दिन
गांव अमर सिंह पिंडी के पास ईंट भट्टे पर काम करने वाले सतपाल ने कुछ दिन पहले ही अपनी बेटी आराध्या का सिमरन पब्लिक स्कूल में एडमिशन करवाया था। शनिवार को आराध्या को तैयार कर पहले दिन स्कूल भेजा गया। पूरा परिवार इस बात से खुश था कि उनकी बेटी एक अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए जा रही है। किसी को क्या पता था कि मासूम का स्कूल में ये पहला ही नहीं आखिरी दिन भी होगा। रविवार को उनका परिवार इस गम में खामोश था। पिता और मां को कोई सुध नहीं थी।
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