कहते हैं जिंदा रहते हुए कुछ ऐसा करना चाहिए कि दुनिया याद रखे। ऐसा ही एक काम किया है परिवार के 18 सदस्यों ने। काश सभी ऐसा करें, तो एक मिसाल कायम हो सकती है।
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देहदान
जहां लोगों में मृत्यु के बाद देह संस्कार को लेकर कई प्रकार के अंधविश्वास फैले हुए हैं, वहीं अंबाला के गांव भुडंगपुर के किसान परिवार के सभी 18 सदस्यों ने मृत्यु के बाद देह दान करने का संकल्प लिया है। साथ ही बाकी लोगों को भी देह दान करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हरबिलास के अनुसार वर्ष 2012 में उनके पिता और परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य कलीराम की मृत्यु के पश्चात उनके परिजनों ने उनकी इच्छा के अनुसार उनकी आंखें 13 साल की बच्ची को दान की थी। साथ ही परिवार के सदस्यों ने भी संकल्प लिया है कि उनकी मृत्यु के पश्चात वह अपने देह का संस्कार करवाने के स्थान पर दान करेंगे, ताकि अगर उनके शरीर से किसी व्यक्ति को अंग की जरूरत होगी तो वह पूरी हो सके। हरबिलास की पत्नी परमजीत कौर की भी मृत्यु के बाद उनका देह दान किया गया था और उनकी आंखें जरूरतमंद को लगाई गई थीं।
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देहदान
तर्कशील संस्था से जुड़ने के बाद लिया निर्णय
परिवार के सदस्य हरबिलास वैसे तो पेशे से किसान हैं और पशुपालन के लिए भी उन्होंने कई कार्य किए हैं। इसके लिए उन्हें कई बार मुख्यमंत्री के साथ-साथ राज्य के अन्य मंत्रियों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। तर्कशील सोसाइटी हरियाणा के साथ जुड़ने के बाद उन्होंने सभी अंधविश्वासों को दूर करते हुए अपने देह दान करने का निर्णय लिया। साथ ही उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को भी देह दान करने के लिए प्रेरित किया। सभी परिवार के सदस्यों ने एक साथ देह दाह का संकल्प लेते हुए चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित अस्पताल में अपना नाम दर्ज करवाया।
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देहदान
बच्ची ने आंखें पाकर भगवान के बजाय कलीराम का किया शुक्रिया
हरबिलास ने बताया कि उनके पिता कलीराम की मृत्यु हुई तो संकल्प के अनुसार उन्होंने अपना देह दान कर दिया। डाक्टरों ने उनके देह से आंखें निकालकर 13 साल की बच्ची को लगाईं। जब उस बच्ची को भगवान का शुक्रिया करने के लिए कहा गया तो उसने भगवान के स्थान पर कलीराम का शुक्रिया किया। उसी प्रेरित कहानी को वह आज कई लोगों को सुनाते हुए प्रोत्साहित करते हैं।
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आर्गन डोनेशन
इन सदस्यों ने लिया देह दान करने का संकल्प
हरबिलास सिंह ने बताया कि उनके पिता कलीराम और पत्नी परमजीत कौर की मौत हो चुकी है। इन दोनों के देह दान कर चुके हैं। हरबिलास ने बताया कि वह छह भाई हैं। उनके अलावा गुलजार सिंह, गुलाब सिंह, रामलाल, करनैल सिंह व बालक राम हैं। लाभ सिंह चचेरा भाई और संतरो देवी उसकी पत्नी हैं। नाछतर कौर, चमेली व बलजीत कौर भाभी हैं। हरविंद्र सिंह बेटा और हरजीत, धर्म सिंह, कर्म सिंह भतीजा हैं। कुलविंद्र कौर, राजविंद्र कौर और मनजीत कौर बहू हैं। इन सभी सदस्यों ने देह दान का संकल्प लिया है।
अंधविश्वास को भी दूर करने का कार्य करते हैं: हरबिलास
परिवार के सदस्य हरबिलास किसानी के साथ-साथ लोगों के अंदर फैले अंधविश्वास को भी दूर करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों में यह अंधविश्वास फैला हुआ है कि अगर उनके देह में से किसी अंग को निकाल दिया जाए तो अगले जन्म में व्यक्ति का वह अंग गायब हो जाता है और इससे ही संबंधित अन्य दकियानुसी बातों को दूर करने के लिए वह लोगों को प्रेरित करते हैं।