'सिक्सर किंग' युवराज सिंह का जलवा आज फिर देखने को मिलेगा, लेकिन उनके सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी है, जिससे पार पाना बेहद जरूरी है।
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युवराज सिंह
इंडियन टीम में युवराज सिंह की वापसी तीन साल बाद हुई, लेकिन यह जश्न का नहीं बल्कि बेहतरीन प्रदर्शन करने का मौका है। अगर वे इस बार मैदान में नहीं चले तो उनके लिए न केवल टीम में बने रहना मुश्किल होगा, बल्कि ढलती उम्र की वजह से क्रिकेट से सन्यास लेने के लिए भी मजबूर होना पड़ेगा।
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युवराज सिंह
वैसे युवराज ने तीन साल बाद भी दमदार वापसी की, जिसकी नजारा इंगलैंड के खिलाफ वार्मआप मैच में देखने को मिला। उन्होंने 48 गेंद में 56 रन की धमाकेदार पारी खेली। नंबर चार रन पर बल्लेबाजी को उतरे युवराज ने तेजतर्रार पारी खेलते हुए केवल 40 गेंदों में छह चौकों और दो छक्कों की मदद से अर्धशतक लगाया।
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युवराज सिंह
युवराज आखिरी बार नीली जर्सी में साल 2013 में खेले थे। लेकिन वापसी वाले मैच में वे विंटेज युवराज के रूप में नजर आए। आदिल रशीद के एक ही ओवर में उन्होंने जबरदस्त छक्के लगाए। इनमें से दूसरा वाला छक्का तो पिक्चर परफेक्ट था। युवराज के निशाने पर विशेष रूप से आदिल रशीद और मोईन अली रहे। इन दोनों के खिलाफ उन्होंने मर्जी से चौके-छक्के लगाए। साथ ही उनकी फिटनेस में भी किसी तरह की कमी नहीं दिखे।
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युवराज सिंह
युवराज सिंह 2011 विश्व कप में जीत के सरताज थे। भारतीय टीम में वह दस महीने बाद वापसी कर रहे हैं, लेकिन इससे पहले उन्होंने धोनी की अगुवाई में वर्ल्ड टी-20 में हिस्सा लिया था। भारतीय टीम टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज से पराजित हो गई थी। युवराज ने रणजी ट्रॉफी में दो शतक लगाए, जिसमें एक दोहरा शतक शामिल था।
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युवराज सिंह
- फोटो : Youtube
युवराज ने 293 वनडे मैचों में 13 शतकों और 51 अर्धशतकों और 36.37 की औसत से 8329 रन बनाए। इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने अपनी उपयोगिता गेंदबाजी में भी साबित की और 111 विकेट लिए। टी20 क्रिकेट में युवराज ने 55 मैचों के दौरान 8 अर्धशतकों और 29.08 की औसत से 1134 रन बनाए। इस फॉर्मेट में युवराज की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें वो 136.96 के स्ट्राइक रेट से खेलते हैं।
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महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह
17 सालों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर के दौरान युवराज सिंह ने टीम इंडिया के सबसे बड़े फिनिशर के तौर पर काफी नाम कमाया है। साल 2000 में अपना पहला वनडे खेलने वाले युवराज सिंह 2007-08 के दौरान टीम के उप-कप्तान भी रहे। जब साल 2007 में महेंद्र सिहं धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने वर्ल्ड टी20 का खिताब जीता तो युवराज ने टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन किया।
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युवराज सिंह
2011 में एक बार फिर भारत ने धोनी की ही कप्तानी में वनडे वर्ल्ड जीता तो युवराज ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ बने। साल 2007 में वर्ल्ड टी20 के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर की सभी छह गेंदों पर छक्के लगाने का हैरतअंगेज कारनामा किया। यह एक ऐसी उपलब्धि थी, जो इससे पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कभी नहीं देखा गया। इसी मैच में उन्होंने टी20 क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड बनाया।
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युवराज सिंह
साल 2011 में पता चला कि युवराज सिंह को कैंसर है। उनकी बाएं फेफड़े में कैंसर का ट्यूमर था। मार्च 2012 में युवराज का किमोथैरेपी हुआ। अप्रैल के महीने में वो इलाज के बाद भारत वापस लौटे। इसी साल युवराज ने सितंबर में महीने में न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की, ठीक 2012 वर्ल्ड टी20 से पहले। साल 2012 में ही युवराज को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया।
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युवराज सिंह
युवराज आईपीएल में भी लगातार दो सालों तक सबसे कीमती क्रिकेटर रहे। साल 2014 में युवराज को रॉयल चैलेंजर्स ऑफ बैंगलोर ने अपनी आईपीएल की टीम में सर्वाधिक 14 करोड़ में लिया। अगले साल यानी 2015 में दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें 16 करोड़ रुपये में खरीदा। इसके बाद साल 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद ने युवराज को 7 करोड़ में खरीदा।
ऐसे में इस बार वापसी युवराज सिंह के चुनौती भरी है। इस बार कप्तान बदल चुका है। नए कप्तान कोहली उनकी तरह ही आक्रामक हैं। ऐसे में युवराज टीम के लिए कितनी बड़ी उपलब्धि साबित होंगे ये तो आज का मैच और आने वाला वक्त ही बताएगा। इस सीरीज में बेहतरनी प्रदर्शन युवराज के करियर की राह तय करने वाला होगा, क्योंकि टीम इंडिया इंगलैंड को टेस्ट सीरीज की तरह ही पराजित करना चाहेगी।