ब्रेव डॉटर ऑफ इंडिया नीरजा भनोट ने अपनी जान देकर 360 लोगों की बचाई थी और वो भी ऐसे, जानकर पूरी दुनिया दंग रह गई थी, पढ़ें बहादुरी का किस्सा...
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5 सितंबर 1986 को अमेरिकी एयरवेज का विमान पैन एम73, करीब 380 यात्री लेकर पाकिस्तान के कराची हवाई अड्डे पर पायलट का इंतजार कर रहा था। अचानक उसमें चार हथियारबंद आतंकवादी घुस गए और सभी यात्रियों को गन प्वांइट पर ले लिया। आतंकवादी प्लेन को 9/11 की तरह इजराइल में किसी निर्धारित जगह पर क्रैश कराना चाहते थे, लेकिन नीरजा भनोट ने ऐसा नहीं होने दिया।
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नीरजा
आतंकियों ने पाकिस्तान सरकार से पायलट भेजने की मांग की, ताकि वो विमान को अपने मन मुताबिक जगह पर ले जा सकें, पाक सरकार ने मना कर दिया। इससे भन्नाए आतंकियों ने विमान में बैठे अमेरिकी यात्रियों को मारने का फैसला कर लिया। वो अमेरिका के जरिए पाक सरकार पर दबाव बनाने की ताक में थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था इसी विमान की 23 साल की अकेली पतली-दुबली फ्लाइट अटेंडेंट उन पर भारी पड़ जाएगी। आतंकियों ने गलती से नीरजा को बुला लिया और सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठा करने को कहा, ताकि वो अमेरिकी नागरिकों को चुन-चुन कर मार सकें।
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लेकिन नीरजा नेआतंकियों की आंखों में धूल झोंक दिया। विमान में अमेरिकी यात्री बैठे हुए थे, पर एक भी आतंकियों के हवाले नहीं हुए। लड़की ने सबके पासपोर्ट छुपा लिए। यह जानकर आतंकी तिलमिला उठे। वे एक अंग्रेज को खींचकर विमान के गेट पर ले आए और गोली मारने लगे। लेकिन यहां भी लड़की ने अपने कार्यकुशलता का परिचय दिया और आतंकियों का ऐसा दिमाग घूमाया कि उन्होंने उस ब्रिटिश को छोड़ दिया। आतंकियों और पाक सरकार में लगातार खींचातानी चलती रही।
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नीरजा भनोट की कहानी
- फोटो : File Photo
इधर 380 डरे हुए लोगों में एक अकेली भारतीय लड़की डटी रही। लड़की ने 17 घंटे हिम्मत बांधे रखी। अचानक उसे खयाल आया कि अब विमान का ईंधन खत्म होने वाला है। ऐसा हुआ तो विमान में अंधेरा छा जाएगा और भागदौड़ मच जाएगी। जिसमें बेतहाशा खून बहेगा। लड़की ने फिर अपने भारतीय होने की पहचान दी। उसने तत्काल आतंकियों को खाने का पैकेट दिया और यात्रियों को आपातकालीन खिड़कियों के बारे में तेजी समझाया। तभी विमान का ईंधन खत्म हो गया। चारों तरफ अंधेरा छा गया।
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नीरजा
इस बीच नीरजा ने मौका पाकर विमान के दरवाजे खोल दिए और यात्रियों ने प्लेन से नीचे कूदाना शुरू कर दिया। लेकिन इसी बीच दहशतगर्दों ने गोलियां दागना शुरू कर दी। मौका देखकर पाक कमांडो भी विमान के पास पहुंच गए। फिर दोनों तरफ से धुआंधार गोलीबारी के बीच लोग भागने लगे थे और नीरजा आतंकियों को छकाने में लगी थी। नीरजा ने आतंकियों को उलझाए रखा ताकि वो किसी को नुकसान न पहुंचा सकें और वो इसमें कामयाब भी रही।
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नीरजा
सबके निकल जाने के बाद आखिर में जब वो विमान से निकलने लगी, तो अचानक उसे कुछ बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी। नीरजा ने रोते हुए बच्चों को छोड़कर भागना ठीक नहीं समझा। वो वापिस गई और बच्चों को ढूंढ निकाला। जैसे ही वह उन्हें लेकर एक आपातकालीन खिड़की ओर बढ़ी एक आतंकी उसके सामने आ खड़ा हुआ। नीरजा ने बच्चों को नीचे धकेल दिया और आतंकी ने नीरजा को गोलियों से छलनी कर दिया।
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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
17 घंटे तक चले इस खून खराबे में अंततः 20 लोगों की जान चली गई और वो भारतीय वीरांगना भी शहीद हो गई। पाक की धरती पर ही दुनिया भर के 360 लोगों की जान बचाने वाली बहादुर बेटी नीरजा को पाकिस्तान भी सेल्यूट करता है। घटना के दो दिन बाद वो अपना 23वां जन्मदिन मनाने वाली थी। लेकिन सपने अधूरे रह गए। 2004 में इस बात का पता चला कि 5 सितंबर, 1986 में हुई उस भयावह घटना के पीछे लीबिया के चरमपंथियों का हाथ था।
इस बहादुर बेटी को भारत ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'अशोक चक्र' से नवाजा तो पाक ने तमगा-ए-इन्सानियत से। भारत सरकार ने नीरजा के नाम पर डाक टिकट भी जारी किया था। मोगा के गांव घलकलां के देशभगत पार्क में उसका एकमात्र स्टेच्यू स्थापित किया गया है। वहीं पर 16 फुट लंबा जहाज बनाया गया है। नीरजा के बलिदान को सलाम करते हुए एक मूवी 'नीरजा' बनाई गई। इसमें नीरजा भनोट का किरदार सोनम कपूर ने निभाया। मूवी को हाल ही में आईफा 2017 में बेस्ट मूवी का अवार्ड दिया गया। साथ ही मूवी को नेशनल अवार्ड से भी नवाजा गया था।