6 साल के मासूम ने पिता की चिता को मुखग्नि दी, यह देखकर मां का कलेजा फट गया और दादी भी फूट-फूट कर रोने लगी, दर्दनाक तस्वीरें।
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कमलजीत सिंह का अंतिम संस्कार
खिलौने थामने की कच्ची उमर में छह साल के मनप्रीत ने नन्हे हाथों से इराक में आईएस के हाथों मारे गए पिता कमलजीत के अवशेषों को मुखाग्नि दी तो गांव छावनी कलां के श्मशान घाट पर मौजूद हर दिल रो पड़ा। होशियारपुर के छावनीकलां (बंगला) गांव के कमलजीत सिंह के अवशेष मंगलवार सुबह 10 बजे के करीब ताबूत में बंद होकर जब गांव पहुंचे तो परिजनों की चीत्कार गूंजने लगी।
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कमलजीत सिंह का अंतिम संस्कार
कमलजीत की मां सुधबुध खो बैठतीं तो कमलजीत के दो बच्चे हैरत और घबराहट से कभी मां तो कभी दादी का मुंह देखने लगते। ताबूत में कमलजीत के अवशेष देख पत्नी हरविंदर कौर, मां संतोष कुमार व पिता प्रेम सिंह संभाले नहीं संभल रहे थे। करीब 2 घंटे बाद दोपहर करीब 12 बजे एसडीएम जतिंदर जोरावर, तहसीलदार अरबिंद प्रकाश वर्मा, विधायक सुंदरशाम अरोड़ा, की मौजूदगी में मनप्रीत सिंह ने पिता कमलजीत को मुखाग्नि दी।
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कमलजीत सिंह का अंतिम संस्कार
छोटे भाई परमिंदर ने परिवार को संभाला
छावनीकलां में पति कमलजीत सिंह के ताबूत को देख पत्नी हरविंदर कौर सुध बुध खो बैठी। दोनों बच्चे मनप्रीत सिंह व सिमरजीत कौर का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों के चीत्कार से पूरा वातावरण गमगीन हो गया। डबडबाई आंखों से शून्य में ताकते पिता प्रेम सिंह व मां संतोष कुमारी उस घड़ी को बार-बार कोस रहे थे, जब उन्होंने बेटे कमलजीत को इराक के लिए विदा किया था। छोटे भाई परमिंदर सिंह आंखों से बह रहे आंसुओं को रोक परिवार को सांत्वना दे रहे थे।
ताबूत में पिंजर व कपड़े देख परिजनों की फूट पड़ी रूलाई
हालांकि प्रशासन के अधिकारियों ने ताबूत खोलने से मना किया हुआ था। सरकार की तरफ से इस बारे में सख्त आदेश दिया गया था, लेकिन परिजनों की जिद के आगे प्रशासन की नहीं चली। श्मशानघाट में जब ताबूत खोला गया तो परिजनों की फिर रुलाई फूट पड़ी। ताबूत में हड्डियों के टुकड़े के साथ कमलजीत के कपड़े भी थे, जिसे परिजनों ने पहचान कर बताया कि यह कपड़े कमलजीत के ही हैं। परिजनों ने रोते हुए कहा कि आखिरी कमलजीत से 15 जून 2014 को अंतिम बार बात हुई थी। अंतिम बार उसे देखने की हसरत भी रह गई। सारी जिंदगी दिल को यह बात कचोटती रहेगी।