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भगवान कृष्ण ने अपने ही पुत्र को क्यों दिया था कोढ़ी होने का श्राप? बड़ी रोचक है ये कहानी

Fri, 23 Aug 2019 02:52 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भगवान कृष्ण - फोटो : Social media
भगवान कृष्ण से जुड़े ऐसे कई रहस्य हैं, जिनके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। ऐसा ही एक रहस्य है उनके पुत्र से जुड़ा, जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने गुस्से में अपने ही पुत्र सांबा को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया था। इसके पीछे की कहानी बड़ी ही रोचक है। 

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मुल्तान में सूर्य मंदिर - फोटो : Social media
कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के श्राप से मुक्ति पाने के लिए सांबा ने सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था, जो अब पाकिस्तान के मुल्तान शहर में स्थित है। इस सूर्य मंदिर को आदित्य मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 
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भगवान कृष्ण - फोटो : Social media
वैसे तो श्रीकृष्ण की कई रानियां थीं, जिनमें से एक जामवंत की पुत्री जामवंती भी थी। श्रीकृष्ण और जामवंती के विवाह के पीछे भी एक कहानी है। पुराणों के अनुसार, बहुमूल्य मणि हासिल करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और जामवंत में 28 दिनों तक युद्ध चला था।  युद्ध के दौरान जब जामवंत ने कृष्ण के असली रूप को पहचान लिया, तो उन्होंने मणि समेत अपनी पुत्री जामवंती का हाथ भी उन्हें सौंप दिया।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
कृष्ण और जामवंती के पुत्र का नाम ही सांबा था। कहते हैं कि सांबा इतना सुंदर और आकर्षक था कि कृष्ण की कई पटरानियां भी उसकी सुंदरता के प्रभाव में आ गई थीं। कहते हैं कि सांबा के रूप से प्रभावित होकर एक दिन श्रीकृष्ण की एक रानी ने सांबा की पत्नी का रूप धारण कर उसे आलिंगन में भर लिया, लेकिन ऐसा करते हुए श्रीकृष्ण ने उन दोनों को देख लिया। इसी बात से गुस्सा होकर श्रीकृष्ण ने सांबा को कोढ़ी हो जाने का श्राप दे दिया। 
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भगवान सूर्य - फोटो : Social media
पुराणों के अनुसार, महर्षि कटक ने सांबा को कोढ़ से मुक्ति का उपाय बताते हुए सूर्य देव की उपासना करने को कहा। उसके बाद सांबा ने चंद्रभागा नदी के किनारे मित्रवन में सूर्य देव का एक मंदिर बनवाया और 12 सालों तक सूर्य देव की कड़ी तपस्या की। 
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चंद्रभागा नदी - फोटो : Social media
कहते हैं कि सूर्य देव ने सांबा की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे कोढ़ से मुक्ति पाने के लिए चंद्रभागा नदी में स्नान करने को कहा। आज भी चंद्रभागा नदी को कोढ़ ठीक करने वाली नदी के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि इस नदी में स्नान करने वाले व्यक्ति का कोढ़ जल्दी ठीक हो जाता है।
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