नल व नील ने पुल बनाने की जिम्मेदारी ली, और वानरों के साथ मिलकर पुल बनाना शुरू किया। जिसमें पत्थर, पेड़ के तने, मोटी शाखाएं एवं बड़े पत्ते तथा झाड़ आदि शामिल थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि नल व नील जानते थे कि कौनसा पत्थर पानी में किस प्रकार रखा जाए कि वह डूबे नहीं तथा अन्य पत्थरों को सहारा भी प्रदान हो। इसलिए उन्होंने 'प्यूमाइस स्टोन' का उपयोग किया होगा। यह ऐसे पत्थर हैं जो ज्वालामुखी के लावा से उत्पन्न होते हैं, इनमे कई सारे छिद्र होने के कारण ये स्पंजी या खांकरा रूप ले लेते हैं और पानी में डूबते नहीं हैं। इस तरह के पत्थरों का वजन सामान्य से कम होता है।