पबित्र राभा ने एनएसडी से निकलने के बाद रंगमंच को बढ़ावा देने की सोची और उन्होंने इन छोटे कद के लोगों को कलाकार बनाने की ठानी। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने राभा और इन सभी लोगों का मजाक उड़ाया। किसी ने बौनों का देश कहा, तो किसी ने बौनों की मंडली, लेकिन राभा ने इन लोगों का हौसला बढ़ाया और उन्हें मंझा हुआ कलाकार बनाया।