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डॉक्टर हिना ही नहीं, इन 5 बेटे-बेटियों ने भी करोड़ों की दौलत को ठुकराकर लिया संन्यास

Thu, 19 Jul 2018 03:47 PM IST
पूर्णिमा आचार्य, अमर उजाला
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Hina Kumari
मुंबई के अरबपति पिता की 28 वर्षीय बेटी हिना हिंगड़ सांसारिक जीवन त्यागकर जैन साध्वी बन गई हैं। एमबीबीएस डॉक्टर बेटी ने जैन भिक्षु की दीक्षा ग्रहण की है। हिना ने सांसारिक सुखों को त्याग कर जैन भिक्षु बनने का फैसला किया। हिना ने सूरत में पूरे विधि विधान और जैन परंपरा के मुताबिक दीक्षा ग्रहण की।
हिना कुमारी की अब नई पहचान साध्वी श्री विशारदमाला हो गई है। 28 साल की हिना ने अध्यात्मिक गुरु आचार्य विजय यशोवर्मा सुरेश्वरजी महाराज से दीक्षा ली है। आइए जानते हैं हिना की तरह ही 5 ऐसे बेटे-बेटियों के बारे में जिन्होंने करोड़ों की संपत्ति छोड़कर संत जीवन जीने का निर्णय लिया....
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भव्य - फोटो : SELF
हीरा व्यापारी का 12 वर्षीय बेटा बना जैन भिक्षु
12 वर्ष की उम्र में भव्य शाह जैन भिक्षु बन गए। उनके ऐसा करने से परिवार खुश है और इसके लिए धूमधाम से पवित्र आयोजन भी किया गया था। उनके पिता दीपेश शाह एक हीरा व्यापारी हैं। उन्होंने बताया था कि भव्य के दीक्षा संस्कार को लेकर उनका परिवार काफी खुश है। चार साल पहले उनकी बेटी ने 12 साल की उम्र में ऐसा ही किया था। 
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12वीं के टॉपर वर्शील ने ली थी जैन धर्म की दीक्षा
गुजरात बोर्ड के टॉपर वर्शील शाह जैन भिक्षु बन गए थे। वर्शील शाह ने गुजरात की 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 99.9 फीसदी अंक हासिल किए थे। वर्शील ने अपने माता-पिता से अपनी इस मेहनत का इनाम मांगने की बजाए संसार को त्याग कर जैन संन्यासी बनने की अनुमति मांगी थी। वहीं वर्शील के माता-पिता को भी अपने बेटे के इस फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

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एमपी के दम्पति ने 3 साल की बेटी को छोड़ ली जैन धर्म की दीक्षा 
मध्य प्रदेश के नीमच के एक जैन युवा (श्वेताम्बर) दम्पति ने अपनी तीन साल की बेटी और 100 करोड़ों की सम्पति को छोड़कर सन्यासी होकर संत और साध्वी जीवन जीने का निर्णय लिया था। हालांकि बाद में यह उनके लिए मुसीबत बन गया। नीमच जिले के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने युवा जैन दंपति को दीक्षा लेने से रोकने की मांग की जो अपनी तीन साल की बेटी और करोड़ों की संपत्ति त्यागकर सूरत में ‘संन्यास दीक्षा’ लेने पहुंचे थे। जैन दंपत्ति के एक रिश्तेदार ने भी इस कदम से असहमति जताई थी।  
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प्रियांशी ने 12 साल की उम्र में ली दीक्षा
पिछले कुछ समय से बड़े कारोबारियों के बच्चे मोह-माया त्यागकर जैन भिक्षु बनकर समाज की सेवा करने का फैसला कर रहे हैं। भव्य शाह की बहन ने प्रियांशी शाह ने चार साल पहले जैन भिक्षु बनने की दीक्षा ली थी। उनके पिता दीपेश शाह अपने बच्चों के फैसले से बहुत खुश हैं।
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24 वर्षीय सीए मोक्षेश जैन ने भिक्षु के रूप में दीक्षा ली
गांधीनगर-अहमदाबाद रोड स्थित तपोवन सर्कल में एक समारोह के दौरान मोक्षेश जैन ने भिक्षु के रूप में दीक्षा ली। मोक्षेश का परिवार जेके कॉर्पोरेशन का मालिक है, जिनकी डायमंड, मेटल और शुगर इंडस्ट्रीज हैं। मोक्षेश का कहना है कि वह अब एक विनम्र छात्र के रूप में धर्म का 'ऑडिट' करना चाहते हैं। उन्होंने बताया था कि जब वह 15 साल के थे तभी उन्हें पहली बार जैन भिक्षु बनने का ख्याल आया। वह मन की शांति चाहते थे जो यह भौतिक संसार उपलब्ध नहीं कराता है।
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