टांग खिंचाई करते तो आपने देखा होगा? लेकिन क्या कभी आपने उंगली खिंचाई के बारे में सुना है? अगर नहीं, तो आपको एक बार जर्मनी जाकर इसे देखना जरूर चाहिए। यहां बावरिया राज्य के कई सारे लोग एक-दूसरे की उंगली खिंचाई करते हुए दिख जाएंगे। दरअसल, उंगली खिंचाई के इस खेल का आरंभ जर्मनी, फिनलैंड, ऑस्ट्रिया, बावरिया आदि जगहों में कई वर्षों पहले हुआ था।
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इन क्षेत्रों के गांवों में दो परिवार के बीच होने वाले विवाद को निपटाने के लिए गांव के बड़े-बुजुर्गों ने एक अलग तरीका निकाला। उन्होंने ऐसे लोगों के बीच उंगली खिंचाई का यह खेल शुरू कर दिया। इस खेल में जो भी जीतता था, फैसला उसके पक्ष में होता था और इस तरह लोगों के बीच आपसी सहमती बनी रहती थी।
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यह खेल बड़े स्तर पर लोकप्रिय हुआ और कुछ यूरोपियन देशों में यह खेला जाने लगा। इसका नाम 'फिंगर फाइट', 'फिंगर पुलिंग', 'फिंगर रेस्लिंग' या 'फिंगरहाकेलन' पड़ गया। 'फिंगरहाकेलन' का अभ्यास करते समय, दोनों विरोधी एक-दूसरे के विपरीत एक टेबल पर बैठे होते हैं और अपने प्रतिद्वंद्वी को टेबल की दूसरी तरफ उंगली पकड़ कर खींचने की कोशिश करते हैं।
इसे आज एक बड़ी प्रतिस्पर्धा के रूप में लिया जाता है। इस खेल के लिए पूरी ट्रेनिंग दी जाती है। लोग घंटों अभ्यास करते हैं और एक-दूसरे को 'फिंगर फाइट' में हराने के लिए नई-नई तकनीक सीखते हैं। इस पारंपरिक मैच में, प्रतिद्वंद्वियों को उम्र और वजन के अनुसार कई वर्गों में विभाजित किया जाता है।