क्या वाकई हम किसी सुपर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में जी रहे हैं? या हमारी सच्चाई कुछ और नहीं बल्कि एक सिमुलेशन का हिस्सा है? ये सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों को परेशान किए हुए है। मशहूर बिजनेस मैन एलन मस्क का कहना है कि बिलियन में केवल एक बार ही ये संभावना हो सकती है कि हमारी दुनिया की ये सच्चाई किसी सुपर कंप्यूटर सिमुलेशन या कहें मेट्रिक्स का हिस्सा ना हो।
वहीं दूसरी तरफ मशहूर खगोलविद नील डिग्रेस टाइसन भी इस बात की पूरी संभावना जताते हैं कि हम एक आभासी दुनिया में जी रहे हैं। तो क्या वाकई हम किसी सच्चाई में ना जीकर एक सिमुलेशन में हैं? क्या हमारा रहना, खाना, सोचना, समझना, लड़ना, झगड़ना सब कुछ एक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का हिस्सा है? क्या हमारी वास्तविकता भ्रम के सिवा कुछ और नहीं है। ऐसे में इसको लेकर एक बहुत बड़ी बहस वैज्ञानिकों के बीच हो रही है। इसी कड़ी में आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से -