रहस्यमयी है 1100 साल पुराना मां महामाया मंदिर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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इस आंदोलन से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
बताया जाता है कि प्रसिद्ध महामाया मंदिर का इतिहास लरका आंदोलन से जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोग बताते हैं कि हापामुनी गांव का एक व्यक्ति जिसका नाम बरजू राम था वह मां महामाया की मंदिर में पूजा कर रहा था। उसी समय बाहरी लोगों ने यहां हमला कर दिया और बरजू राम की पत्नी-बच्चे को मार दिया। बरजू के दोस्त राधो राम ने बरजू को बताया कि उसकी पत्नी और बच्चे की हत्या हो गई है। इसके बाद राधो राम ने मां महामाया की शक्ति से हमलावरों से लड़ गया। तब मां महामाया ने प्रकट होकर राधो राम से कहा कि तुम अकेले इन आक्रमणकारियों से लड़ सकते हैं, लेकिन तुम पीछे देखोगे तो तुम्हारा सिर धड़ से अलग हो जाएगा।
मां भगवती की कृपा से राधो राम अपनी तलवार से हमलावरों पर विजय पाने लगा, लेकिन उसने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा उसका सिर धड़ से अलग हो गया। राधो राम जिस स्थान पर पूजा करता था उस जगह पर आज उन दोनों की समाधि है। मुख्य मंदिर आज भी खपरैल का ही बना हुआ है। मंदिर में कई देवी देवताओं की प्रतिमा है।