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कहानी क्रोकर मछली की: बीमारियों के इलाज से लेकर सर्जरी में होती है इस्तेमाल, औषधीय गुणों के कारण लाखों में है कीमत

Mon, 14 Jun 2021 02:41 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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क्रोकर मछली (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 26 किलो वजनी क्रोकर मछली के बहुत ऊंची कीमत पर बिकने की चर्चा काफी जोरों पर है। ग्वादर जिले में पकड़ी गई ये मछली 7 लाख 80 हजार रुपए में बिकी। आपको बता दें कि ये मछली काफी वजनी और कई खूबियों के वजह से काफी महंगी होती है। कुछ साल पहले भी ये मछली 17 लाख रुपये में बिकी थी। आपको बता दें कि क्रोकर मछली कई तरह के औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसके शरीर में पाए जाने वाले एयर ब्लैडर का सर्जरी में इस्तेमाल होता है। इसका इस्तेमाल कर ऐसे टांके बनाए जाते हैं, जो सर्जरी के बाद काम आते हैं। ये टांके इंसान के शरीर में काफी आसानी से घुल जाते हैं और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। खासकर ये टांके हार्ट सर्जरी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की एक रिसर्च के मुताबिक, लार्ज यलो क्रोकर मछली मेडिसिन की दुनिया में काफी पूछ-परख रखती है।

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क्रोकर मछली (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
रिसर्च में ये बात सामने आई है कि ये मछली इंसान के शरीर में अतिरिक्त कोशिकाओं का निर्माण रोककर कैंसर से बचाने में मदद करती है। इससे शरीर में लगी चोट और संक्रमण का इलाज भी हो पाता है।
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क्रोकर मछली (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
आमतौर पर चीन और दक्षिणी पीला सागर में मिलने वाली इन मछलियों की मांग तो बहुत काफी है, लेकिन इन्हें पकड़ना भी काफी मुश्किल काम है। क्योंकि ब्रीडिंग सीजन के दौरान ही ये मछली ऊपर की ओर आती है, जो केवल दो महीनों का होता है। यानी पूरे साल में केवल दो महीने ही इन्हें पकड़े जाने की संभावना रहती है। क्रोकर मछली के कीमती होने की एक वजह ये भी है।

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क्रोकर मछली (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
सत्तर के दशक में चीन में लगभग 2 लाख टन कोक्रर मछली पकड़ी गई और इन्हें दूसरे देशों में भी बेचा गया। लेकिन उसी समय से इन मछलियों की संख्या काफी तेजी से घट रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इसे विलुप्त हो रही मछलियों की श्रेणी में रेड लिस्ट में इसे डाल दिया है।
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क्रोकर मछली (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
मछलियों की संख्या में लगातार हो रही कमी के कारण इससे दवाई तैयार करने वाले देश जैसे चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग परेशान हो गए हैं। ये देश अब लगातार इस कोशिश में लगे हैं कि किसी तरह इन मछलियों का पालन हो सके।
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क्रोकर मछली (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
ब्रिटेन की एक्वाफीड नामक वेबसाइट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया और ताइवान ने इसकी ब्रीडिंग पर शोध भी किए, लेकिन वे ज्यादा कामयाब नहीं हो सके।
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