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मिल गया भगवान हनुमान के जीवित होने का सबूत, 41 साल बाद श्रीलंका में फिर आएंगे इनसे मिलने 

Thu, 03 Jan 2019 04:40 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : Social Media
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर पवनपुत्र हनुमान भगवान की जाति को लेकर काफी कुछ चल रहा है। नेता अपनी-अपनी मर्जी से कुछ भी बता रहे हैं। लेकिन हिंदू धर्म में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पवनपुत्र हनुमान जी की महिमा का गुणगान जितना किया जाए उतना कम है। 
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- फोटो : डेमो
कलियुग में बजरंगबली के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वे अमर हैं। कहा जाता है कि भगवान हनुमान जी हिमालय के जंगलों में रहते हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी के प्रमाण अब तक नहीं मिल सके हैं। लेकिन आज हम आपको सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हनुमान जी से जुड़ी इस कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं कि क्या सच में आज भी हनुमान जी हमारे आस-पास हैं।
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- फोटो : Social Media
आपको बता दें कि कुछ साल पहले एक खबर सुर्खियों में आई थी कि हनुमान जी अब भी अपने भक्तों की पुकार सुन उनके पास आते हैं। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, श्रीलंका के जंगलों में 'मातंग' नाम की एक जनजाती निवास करती है। इन कबीलाई लोगों का कहना है कि आज भी उनसे मिलने हनुमान जी आते हैं।

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- फोटो : File Photo
एक अंग्रेजी अखबार ने इन जनजातियों पर अध्ययन करने वाले आध्यात्मिक संगठन 'सेतु' के हवाले से इस सनसनीखेज खोज का खुलासा किया है। कहा गया है कि हनुमान जी इस जनजाति के लोगों से साल 2014 में मिलने आए थे, अब दोबारा 41 साल बाद वो फिर से आएंगे। यानि साल 2055 में बजरंगी अपने भक्तों से मिलने फिर से यहां आएंगे।
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- फोटो : Social Media
आपको बता दें कि 'मातंग' एक ऐसी जनजाति है जो श्रीलंका के अन्य कबीलों से बिल्कुल अलग है। इनकी संख्या भी बेहद कम है। सेतु नामक संगठन के मुताबिक, 'मातंग' समुदाय का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि हनुमान जी को वरदान मिला था कि उनकी मृत्यु कभी भी नहीं होगी।
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- फोटो : Social Media
हालांकि पुराणों में बताया गया है कि भगवान राम के स्वर्ग गमन के बाद हनुमान जी अयोध्या से दक्षिण भारत के जंगलों में चले गए थे। इसके बाद समंदर को दोबारा लांघकर वो श्रीलंका पहुंचे। उस दौरान हनुमान जी जब तक वहां ठहरे, 'मातंग' कबीले के लोगों ने उनकी खूब सेवा की। इस सेवा के बदले हनुमान जी ने इस कबीले के लोगों को ब्रह्मज्ञान का बोध कराया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी वादा किया कि वे हर 41 साल बाद उनसे मिलने जरूर आएंगे।
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