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भारत का वो महानगर, जिसे पुर्तगाल ने ब्रिटेन को दे दिया था दहेज में

Thu, 17 Dec 2020 09:21 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
पश्चिम भारत के समुद्री तट 17वीं शताब्दी के मध्य तक पुर्तगाली साम्राज्य के अधीन थे। लेकिन इसके बाद से यहां ब्रिटिशों का कब्जा शुरू हो गया। इन तटों के ब्रिटिशों के कब्जे में आने की कहानी बेहद ही रोचक है। दरअसल, पुर्तगाली राजघराने ने ब्रिटिश राजघराने को बॉम्बे और कुछ अन्य द्वीप दहेज में सौंप दिए थे। दोनों राजघरानों के बीच ये शादी ऐतिहासिक थी। क्योंकि यह शादी प्रेम या विवाह नहीं बल्कि एक राजनीतिक संधि थी। आइए जानते हैं बॉम्बे (वर्तमान में मुंबई) के इतिहास से जुड़े कुछ रोचक किस्से...
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मुंबई का बांद्रा वर्ली सी-लिंक - फोटो : PTI
मुगल वंशों के द्वारा, पानीपत की पहली लड़ाई जीतने के बाद भारत की दिल्ली सल्तनत पर शासन करना शुरू कर दिया। 1530 में हुमायूं के गद्दी पर बैठते ही गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह का रुतबा बढ़ गया। सुल्तान बहादुर शाह ने पुर्तगाली एडमिरल के पास अपने प्रमुख दूत शाह ख्वाजा को भेज वसई समेत बॉम्बे के सात द्वीपों को लेकर एक समझौता किया। 1534 में हुए शांति समझौते के तहत बॉम्बे समेत सात द्वीप 1535 में पुर्तगाल को सौंप दिए गए और यहां से मुस्लिम शासन खत्म हो गया।
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मुंबई के बांद्रा में खेलता बच्चा - फोटो : PTI
उस समय यह इलाका समुद्री सेना, समुद्री व्यापार और सीमा सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम था। ऐसे में अंग्रेजों की नजर भी इस पर थी। ब्रिटिशों ने पुर्तगालियों से 1612 में स्वाली का युद्ध लड़कर जब जीत हासिल की, तो बॉम्बे द्वीप समेत पश्चिम भारत की तटीय सीमा से पुर्तगाली साम्राज्य की जड़ें हिल गईं। इस जीत के बाद से ही ब्रिटिशों और पुर्तगालियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का केंद्र बन गए।

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मुंबई (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
पुर्तगालियों ने अरब सागर में माहिम की खाड़ी तक नजर बनाए रखने के लिए बांद्रा में वॉचटावर बनवाया था, जहां बंदूक लिए सैनिक भी तैनात किए गए थे। तनाव बढ़ता देख ब्रिटिश साम्राज्य की सूरत काउंसिल ने 1652 में प्रस्ताव रखा कि ईस्ट इंडिया कंपनी पुर्तगाल से बॉम्बे को खरीद ही ले। पुर्तगाल के राजा जॉन चतुर्थ से बॉम्बे खरीदने का प्रयास करने का नतीजा ये हुआ कि राजा की बेटी की शादी ब्रिटिश राजा के साथ तय हुई।
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मुंबई का मरीन ड्राइव - फोटो : Pixabay
1661 में ब्रिटेन साम्राज्य के राजा चार्ल्स द्वितीय के साथ राजकुमारी कैथरीन ब्रगेंजा की शादी तय हुई, जिसमें 5 लाख यूरो के साथ ही बॉम्बे समेत अन्य द्वीपों को दहेज के तौर पर दिया गया।
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गेटवे ऑफ इंडिया - फोटो : Pixabay
भले ही यह शादी एक राजनीतिक समझौता था, लेकिन ब्रिटिशों के राज में ही मायनों में बॉम्बे का विकास हुआ। पुर्तगालियों के समय बॉम्बे का मुख्य व्यापार सिर्फ नारियल और जूट ही था, लेकिन ब्रिटिश सम्राज्य में बॉम्बे दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बन गया।
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