सरदार पटेल
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सेना भेजने पर पटेल और नेहरू में मतभेद
शुरू में नेहरू हैदराबाद में सेना भेजने के पक्ष में नहीं थे। पटेल के जीवनीकार राजमोहन गांधी लिखते हैं, 'नेहरू का मानना था कि हैदराबाद में सेना भेजने से कश्मीर में भारतीय सैनिक ऑपरेशन को नुकसान पहुंचेगा।' एजी नूरानी अपनी किताब 'द डिसट्रक्शन ऑफ हैदराबाद' में लिखते हैं, 'हैदराबाद के मुद्दे पर कैबिनेट बैठक बुलाई गई थी, जिसमें नेहरू और पटेल दोनों मौजूद थे। नेहरू सैद्धांतिक रूप से सैन्य कार्रवाई के खिलाफ नहीं थे, लेकिन वो इसे अंतिम विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते थे। वहीं, पटेल के लिए सैनिक कार्रवाई पहला विकल्प था। बातचीत के लिए उनके पास धैर्य नहीं था। नेहरू निजाम की नीतियों के खिलाफ जरूर थे, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उनका उनसे कोई विरोध नहीं था। वो हैदराबाद की संस्कृति के प्रशंसक थे जिसका कि उनकी मित्र सरोजनी नायडू प्रतिनिधित्व करती थीं। लेकिन पटेल को व्यक्तिगत और वैचारिक दोनों तरह से निजाम से नफरत थी।'