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अजब-गजब: भारत के इन रेलवे स्टेशनों का नहीं है कोई नाम, कुछ इस तरह से यात्री करते हैं यहां पर सफर

Sat, 25 Sep 2021 05:36 PM IST
संकल्प सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Istock
हम में से ज्यादातर लोग ट्रेन में अक्सर सफर करते हैं। भारत में ट्रेन को देश की लाइफ लाइन भी कहा जाता है। ये रोजाना लाखों लोगों को उनके गंतव्य स्थल तक पहुंचाती है। हालांकि ट्रेन में सफर करने से पहले हमें जहां जाना होता है उस स्टेशन के नाम का टिकट हम पहले ही कटवा लेते हैं। पर क्या आपको पता है कि भारत में कुछ स्टेशन्स ऐसे भी हैं, जिनका कोई नाम नहीं है। इसे जानने के बाद आपको हैरानी जरूर हुई होगी, लेकिन ये बात पूरी तरह सच है। इन बेनाम स्टेशनों पर ट्रेनें रोजाना आकर रुकती हैं, जिन पर सवारियां चढ़ती और उतरती हैं। आपको बता दें कि भारत में ऐसे 2 रेलवे स्टेशन्स हैं, जिनका कोई नाम नहीं है। अब आपके दिमाग में ये बात जरूर आ रही होगी कि जब इन स्टेशनों का कोई नाम नहीं है तो यात्री यहां पर सफर कैसे करते हैं? आइए बताते हैं आपको इस रोचक विषय के बारे में -
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Istock
भारत में ऐसे 2 स्टेशन्स हैं, जिनका कोई नाम नहीं है। एक पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के बांकुरा - मैसग्राम रेलखंड पर स्थित है, तो दूसरा झारखंड के रांची-टोरी रेलखंड के पास है। इन दोनों स्टेशनों को क्यों अब तक कोई भी नाम नहीं मिल पाया है। इसके पीछे की कहानी काफी रोचक है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Istock
पश्चिम बंगाल के बांकुरा-मैसग्राम रेल लाइन पर स्थित इस बिना नाम वाले स्टेशन को साल 2008 में बनाया गया था। स्टेशन को निर्मित करने के बाद उसका नाम रैनागढ़ रखा गया। हालांकि इस नाम को लेकर गांव के कई लोगों ने आपत्ति जताई और उन्होंने इसकी शिकायत कर दी। तब से इस स्टेशन के नाम को लेकर विवाद चल रहा है। यही एक बड़ी वजह है जिसके चलते अब तक रेलवे स्टेशन को कोई नाम नहीं मिला है।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Istock
वहीं दूसरी तरफ झारखंड के रांची से जब टोरी वाली लाइन पर जाते हैं तो बीच में एक ऐसा स्टेशन आता है, जिसका कोई नाम नहीं है। इस स्टेशन के बिना नाम के होने के पीछे भी एक बहुत ही रोचक किस्सा है। साल 2011 में जब इस रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के परिचालन की शुरुआत की गई। उस दौरान इसका नाम बड़की चांपी रखा गया था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Istock
इस नाम को लेकर वहां के स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए कहा कि उन लोगों ने इस स्टेशन को बनाने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। इस वजह से इसका नाम कमले होना चाहिए। तब से अब तक इस स्टेशन का कोई नाम नहीं है। रिपोर्ट की मानें तो रेलवे स्टेशन के आधिकारिक रजिस्टर में इस स्टेशन का नाम बड़की चांपी ही रखा गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Istock
हालांकि गांव के लोगों में इसको लेकर काफी मतभेद है। इसी वजह से रेलवे स्टेशन पर कोई साइन बोर्ड नहीं है, जो उस स्टेशन का नाम बताता हो। यहां पर आने जाने वाले यात्री इसी स्टेशन पर चढ़ते हैं और उतरते भी यहीं पर हैं।
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