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भारत की आबोहवा में कौन सा सांप है सबसे खतरनाक?

Sat, 11 Jul 2020 09:03 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
एक नई स्टडी के जरिए भारत में पिछले बीस सालों में सांप के काटने से तकरीबन 12 लाख लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया है। इस स्टडी के अनुसार सांप के काटने या सर्प दंश से मरने वाले तकरीबन आधे लोगों की उम्र 30 साल से 69 साल के बीच थी। मरने वालों में एक चौथाई बच्चे थे। सर्प दंश से होने वाली ज्यादातर मौतों के लिए 'रसेल्स वाइपर' (दुबोइया), 'करैत' और 'नाग' प्रजाति के सांप जिम्मेदार हैं। हालांकि कम से कम 12 ऐसी अन्य प्रजातियां हैं जिनसे बचे हुए लोगों की मौत हुई। सर्प दंश के ज्यादातर मामले इसलिए भी जानलेवा बन जाते हैं। क्योंकि ये घटनाएं उन इलाकों में होती हैं जहां मेडिकल हेल्प तक लोगों की आसानी से पहुंच नहीं होती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मॉनसून के मौसम में
सर्प दंश की तकरीबन आधी घटनाएं मॉनसून के मौसम में होती हैं, यानी जून महीने से सितंबर के बीच। माना जाता है कि इस दौरान सांप अपनी बिलों से बाहर निकलते हैं। अधिकांश मामलों में सांप अपने शिकार के पैर में ही काटता है। साइंस जर्नल 'ईलाइफ' में प्रकाशित इस रिसर्च पेपर को भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
भारत की महत्कावांक्षी 'मिलियन डेथ स्टडी' प्रोजेक्ट से इस रिसर्च के लिए आंकड़ें जुटाए गए हैं। तकरीबन पूरे भारत और दक्षिण एशिया में पाए जाने वाले 'रसेल्स वाइपर' को बहुत से लोग दुबोइया सांप भी कहते हैं। ये सांप की खतरनाक प्रजातियों में गिना जाता है। ये चूहे गिलहरी जैसे कतरने वाले जानवर खाकर अपना पेट भरते हैं, अक्सर इंसानों के रिहाइशी इलाकों के आस-पास पाए जाते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
मेडिकल हेल्प की जरूरत
भारत में पाया जाने वाला करैत दिन की रोशनी में अमूमन शांत रहता है लेकिन रात ढलते ही ये खतरनाक हो जाता है। इसकी लंबाई पौने दो मीटर यानी पांच फुट नौ इंच तक हो सकती है। जहां तक नाग सांप की बात है तो ये भी ज्यादातर अंधेरे में ही हमला करते हैं। इसका सर्प दंश इतना खतरनाक होता है कि इंटरनल ब्लीडिंग की संभावना रहती है और फौरन मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
रिसर्च स्टडी में ये भी पाया गया कि साल 2001 से साल 2014 के दरमियान सर्प दंश के तकरीबन 70 फीसदी मामले आठ राज्यों में हुए। ये राज्य हैं- बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश (तेलंगाना समेत), राजस्थान और गुजरात। स्टडी के अनुसार 70 साल से कम उम्र के लोगों की सर्प दंश से मृत्यु की संभावना 250 में से एक मामले में रहती है। लेकिन कुछ इलाकों में ये खतरा 100 में से एक मामले तक बढ़ जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विश्व स्वास्थ्य संगठन
शोधकर्ताओं का कहना है कि मॉनसून के मौसम में गांवों में रहकर खेती-बाड़ी करने वालों पर सर्प दंश का सबसे ज्यादा जोखिम रहता है। उनका कहना है कि इन इलाकों में लोगों को खेती-बाड़ी के दौरान सांप से सुरक्षित रहने के सामान्य तौर तरीके सिखाए जाने चाहिए। रबर के जूते, दस्ताने और टॉर्च से खतरा कम रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि सर्प दंश अब वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के देशों में सर्प दंश के मामलों को नजरअंदाज करने का चलन रहा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में हर साल सर्प दंश से 81 हजार से 138,000 लोगों तक की मौत हो जाती है। और इस संख्या से तीन गुना बच तो जाते हैं लेकिन उनमें कुछ न कुछ स्वास्थ्य समस्या रह जाती है।
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