अंतरिक्ष में भारत ने अपना धाक जमा लिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने अतंरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 60 के दशक में बेहद सीमित संसाधनों के साथ की थी। भारत ने अपना पहला रॉकेट 21 नवंबर 1963 को लॉन्च किया था जिसके 45 साल बाद मिशन मून पर बड़ी कामयाबी हासिल की थी। अतंरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत के करीब 50 साल बाद भारत ने मंगल यान भेजा। भारत ने जब अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत की थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि देश का अंतरिक्ष यान एक दिन चांद और मंगल पर भी जा पाएगा।
भारत ने 22 अक्टूबर 2008 को अपना पहला चंद्रयान भेजा था। यह करीब 10 महीने यानी 22 अक्टूबर 2008 से 30 अगस्त 2009 तक चंद्रमा के चारों तरफ घूमता रहा। वैज्ञानिकों ने चंद्रयान में मून इम्पैक्ट प्रोब ( MIP) नाम की डिवाइस लगाई थी। यह 14 नवंबर 2008 को चांद की सतह पर उतरा और भारत का अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने धाक जमा लिया। इस मामले में भारत चौथा देश बन गया। इससे पहले अमेरिका, रूस और जापान ने यह कामयाबी हासिल की थी। इस डिवाइस ने ही चांद की सतह पर पानी को खोजा था। इस बड़ी खोज के लिए नासा ने भी भारत की तारीफ की थी, क्योंकि इसरो को पहली बार में यह सफलता मिली थी।