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इतिहास में तिज के नाम से दर्ज है चाबहार बंदरगाह, 1980 के ईरान-इराक युद्ध में बना था खास

Fri, 17 Jul 2020 03:46 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चाबहार बंदरगाह - फोटो : फाइल फोटो
ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी-पूर्वी समुद्री किनारे पर बना है। यह बंदरगाह भारत के पश्चिमी समुद्री तट से ईरान के दक्षिणी समुद्र तट को जोड़ता है। ईरान ने चाबहार बंदरगाह को व्यापार मुक्त क्षेत्र घोषित किया है। ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह बंदर अब्बास है, जो यूएई और ओमान के बेहद नजदीक है। इस बंदरगाह से मध्य पूर्वी देश विभिन्न देशों को तेल की सप्लाई करते हैं। ईरान के पास अपना स्वायत और स्वतंत्र बंदरगाह नहीं है। इस कमी को पूरा करने का सारा दायित्व चाबहार के ऊपर है।
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चाबहार बंदरगाह - फोटो : फाइल फोटो
चाबहार बंदरगाह के इतिहास की बात करें, तो इसका जिक्र अलबरूनी की किताब तारीख-ए-अल-हिंद में भी मिलता है। हालांकि, इस किताब में बंदरगाह का जिक्र तिस के नाम से किया है, जो बाद में तिज बन गया। एलेक्जेंडर ने भी भी इस तिज को पार किया था। साल 1970 में यह बंदरगाह आधुनिक चाबहार के रूप में दुनिया के सामने आया था और 1980 के ईरान इराक युद्ध में काफी अहम बन गया था।
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चाबहार बंदरगाह - फोटो : सोशल मीडिया
साल 2002 में भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास में योगदान को लेकर बात की थी। इसके बाद जनवरी 2003 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति खातमी भारत में गणतंत्र दिवस की परेड में मुख्य अतिथि के रूप में आए और उस समय भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर हस्ताक्षर किए थे। इस परियोजना का उद्येश्य दक्षिण एशियाई देशों को फारस की खाड़ी अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ना था। लेकिन कुछ कारणों से इस परियोजना को सही दिशा नहीं मिल पाया।

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चाबहार समझौता - फोटो : PIB
साल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना को फिर से जीवित किया। शुरूआत में स बंदरगाह की क्षमता महज 2.5 मिलियन टन सामान ढोने की थी, जिसको इसे 80 मिलियन टन तक बढ़ाने की योजना थी।
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चाबहार बंदरगाह - फोटो : फाइल फोटो
चाबहार बंदरगाह भारत के कूटनीतिक और सामरिक महत्व के लिए बहुत खास है। इस बंदरगाह का विकास भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। लेकिन इस बंदरगाह के विसकित होने से ना सिर्फ भारत को फायदा है, बल्कि अफगानिस्तान और ईरान को भी इस बंदरगाह से काफी लाभ होगा।
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