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Chandrayaan-3: सिर्फ इतने दिन काम करेगा रोवर प्रज्ञान! जानिए आखिर क्या है वजह, अभी तक की है ये खोज

Mon, 28 Aug 2023 03:44 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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pragyan rover will work only for a week - फोटो : isro
Chandrayaan-3: भारत की अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) ने चांद पर इतिहास रच दिया है। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया गया है। इसके अलावा अमेरिका, चीन और रूस के बाद चांद की सतह पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम लगातार चांद की तस्वीरें और वीडियो भेज रहा है, तो वहीं लेंडर से बाहर निकलने के बाद प्रज्ञान रोवर लगातार नई-नई जानकारियां दे रहा है। 

चंद्रमा विक्रम लैंडर और चंद्रयान -3 के प्रज्ञान रोवर के भेज वीडियो और फोटो को इसरो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयर कर रहा है। इसरो ने बताया है कि चंद्रमा की सतह पर प्रज्ञान रोवर अभी तक आठ मीटर तक घूमा है। इसरो की तरफ से एक वीडियो शेयर किया गया था जिसमें विक्रम लैंडर के रैंप से प्रज्ञान रोवर को बाहर निकलते हुए देखा जा सकता है। आइए जानते हैं चंद्रयान 3 से जुड़े अब तक के बड़े अपेडट्स...
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pragyan rover will work only for a week - फोटो : Isro

सिर्फ इतने दिन काम करेगा रोवर

चांद की सतह पर रोवर सिर्फ एक दिन (धरती के 14 दिन) काम कर सकेगा। रोवर प्रज्ञान में 6 व्हील, नेविगेशन कैमरा और 50W वाले सोलर पैनल लगाए गए हैं।  Rx/Tx एंटीना के माध्यम से यह लैंडर से सीधा कनेक्ट करता है। कैमरा फोटो खींचकर विक्रम लैंडर को भेजते रहेगा। 


 
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pragyan rover will work only for a week - फोटो : Isro
लैंडिग के बाद विक्रम और प्रज्ञान सिर्फ 14 दिनों तक काम करेंगे। चांद पर 23 अगस्त को सूरज उदय हुआ था और 5-6 सितंबर को ढल जाएगा। अब यह दोनों सिर्फ एक हफ्ते तक काम कर सकेंगे। अभी तक चंद्रयान के लैंडर और रोवर सोलर पैनल के माध्यम से ऊर्जा जनरेट कर रहे हैं। लेकिन जब 14 दिन बाद वहां पर रात होगी, तब कठिन समय शुरू होगा। 

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pragyan rover will work only for a week - फोटो : Isro
रात होने के बाद इनको ऊर्जा का स्त्रोत नहीं मिल सकेगा, तो पावर जनरेट होने की प्रक्रिया रुक जाएगी और ऊर्जा नहीं मिलेगी तो भयानक ठंड शायद यह झेल न सकें। इसकी वजह से इन दोनों की उम्र सिर्फ 14 दिन बताई जा रही है। 

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pragyan rover will work only for a week - फोटो : iStock
अभी तक क्या-क्या मिली जानकारी

चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने चांद की सतह के तापमान की जानकारी दी है। इसरो ने लैंडर में एक खास तरह का थर्मामीटर भेजा है, जो सतह के ऊपर और सतह से 10 सेंटीमीटर नीचे का तापमान सिर्फ देखकर नाप सकता है। चांद की सतह पर तापमान 50 से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच है, जबकि ठीक उसकी सतह के नीचे 10 सेंटीमीटर अंदर तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस है। इसके अलावा इसरो ने चंद्रयान-3 के भेजे कई फोटो और वीडियो को शेयर किया है। 

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pragyan rover will work only for a week - फोटो : iStock
रहस्यों से उठाएगा पर्दा

चंद्रमा की सतह के बारे में पता लगाना रोवर का प्राथमिक मिशन है। इसके अलावा चांद के भूविज्ञान के रहस्यों से पर्दा उठाना, इसकी संरचना और इतिहास के बारे में जानकारी हासिल करना है। चंद्रयान-3 रोवर 14 दिनों तक प्रयोग करेगा। इसमें चंद्रमा की सतह की खनिज संरचना का विश्लेषण भी शामिल है। इसरो अध्यक्ष के मुताबिक, रोवर प्रज्ञान बहुत अच्छे से काम कर रहा है। 
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