प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
डॉक्टर डंकन मैकडॉगल का प्रयोग
डॉक्टर डंकन मैकडॉगल ने एक बेहद हल्के वजन वाले फ्रेम का एक खास तरीके का बिस्तर बनाया जिसे उन्होंने अस्पताल में मौजूद उस बड़े तराजू पर फिट किया। उन्होंने तराजू को इस तरह से बैलेंस किया कि वजन में औंस (एक औंस करीब 28 ग्राम के बराबर होता है) से भी कम बदलाव को मापा जा सके। जो लोग गंभीर रूप से बीमार होते थे या जिनके बचने की कोई उम्मीद नहीं होती थी, उन्हें इस खास बिस्तर पर लिटाया जाता था और उनके मरने की प्रक्रिया को करीब से देखा जाता था।
शरीर के वजन में हो रहे किसी भी तरह के बदलाव को वो अपने नोट्स में लिखते रहते। इस दौरान वो ये मानते हुए वजन का हिसाब भी करते रहते कि मरने पर शरीर में पानी, खून, पसीने, मल-मूत्र या ऑक्सीजन, नाइट्रोजन के स्तर में भी बदलाव होंगे। उनके इस शोध में उनके साथ चार और फिजिशियन काम कर रहे थे और सभी इस आंकड़ों का अलग-अलग हिसाब रख रहे थे।