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Durga Puja: छपरा में 103 वर्षों से लगातार बंगाली रीति रिवाज से हो रहा सिंदूर खेला, खोइछा भरकर माता की विदाई

Sun, 13 Oct 2024 05:17 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा

सार

Durga Puja: छपरा में 103 वर्षों से लगातार बंगाली रीति रिवाज से हो रहा सिंदूर खेला, खोइछा भरकर माता की विदाई
Durga Puja: Bengali community women bid farewell to Goddess by donating vermilion, filling khoicha in Chhapra
 
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मां दुर्गा को सिंदूर लगातीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
उत्तर बिहार के छपरा में बंगाली समाज की महिलाओं ने माता दुर्गा की विदाई के अवसर पर एक अनूठी परंपरा का निर्वहन किया। इस मौके पर 103 वर्षों से अनवरत चली आ रही परंपरा के अनुसार, महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर 'सिंदूर खेला' का आयोजन किया। यह आयोजन कालीबाड़ी मंदिर में किया गया, जो क्षेत्र के प्राचीनतम काली बाड़ी में से एक है।
 
 
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एक-दूसरे को सिंदूर लगातीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
परंपरागत विदाई की विधि
कालीबाड़ी में हर साल माता की स्थापना और पूजा विधिपूर्वक होती है। इस वर्ष भी माता का पूजन और हवन करने के बाद बुजुर्ग महिलाओं ने माता को सिंदूर लगाया और उनके आंचल में खोईचा डालकर विदाई दी। यह मान्यता है कि इस रस्म को निभाने से पति की उम्र लंबी होती है।
 
बंगाली समाज की परंपरा के अनुसार, विजयादशमी के दिन जहां अन्य स्थानों पर माता की विदाई होती है, वहीं छपरा के कालीबाड़ी में एकादशी के दिन विशेष रूप से सिंदूर खेला का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर महिलाओं ने मिलकर माता को सिंदूर से रंगा और उनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
 
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सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं ने निकाली उल्लू ध्वनि - फोटो : अमर उजाला
उल्लू ध्वनि और आनंद
सिंदूर खेला के दौरान महिलाएं एक विशेष प्रकार की आवाज निकालती हैं, जिसे उलू कहा जाता है। यह ध्वनि प्रत्येक शुभ अवसर पर की जाती है। इस बार भी जब माता की विदाई का समय आया, तो सभी महिलाएं उल्लू की ध्वनि निकालते हुए एक-दूसरे को सिंदूर लगाती रहीं।
 

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महिलाओं ने एक-दूसरे को लगाया सिंदूर - फोटो : अमर उजाला
मिठाई के साथ विदाई
इस सांस्कृतिक अनुष्ठान में महिलाओं ने माता को मिठाई खिलाने के बाद नम आंखों से विदाई दी। सभी ने मिलकर मां दुर्गा से आग्रह किया कि वह अगले वर्ष पुनः उनके बीच आएं। यह आयोजन न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिकता का भी।
 
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छपरा कालीबाड़ी - फोटो : अमर उजाला
पूजा की विशेषताएं
कालीबाड़ी में होने वाली यह पूजा पूरी तरह से बंगाली रीति रिवाजों के अनुसार होती है। यहां आने वाले ब्राह्मण भी बंगाल से आते हैं और पूजा अर्चना के लिए यहीं रहते हैं। इस साल के आयोजन में शामिल होने वाली महिलाएं एकत्रित होकर मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा को व्यक्त करने में पीछे नहीं रहीं। साल भर की तैयारी के बाद, एकादशी के दिन माता दुर्गा का विसर्जन किया जाता है। इस प्रकार, यह परंपरा न केवल धार्मिक मान्यता का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक भावना को भी बढ़ावा देती है।
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