खगेश्वर नाथ महादेव का मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
इस मंदिर के पंडा ने बताया कि जब रामायण में रावण के पुत्र मेघनाथ ने राम-लक्ष्मण पर मोघपाश फेंका था, तब हनुमान जी ने गरुड़ से मदद मांगी थी। उसके बाद से गरुड़ को राम-लक्ष्मण के भगवान होने पर शक हो गया था और तब जाकर यहीं पर भोलेनाथ ने गरुड़ को खग रूप लेकर उनकी शंका दूर की थी। यह मंदिर इतना पुराना है कि यहां लगे मंदिर के चौखट पत्थर के बने हुए हैं, जो प्राचीन काल में ही लगा था। यह अपनी खास पहचान के लिए जानी जाती है। यही वजह है कि आसपास के जिले के नहीं बल्कि दूर दराज नेपाल के लोग भी मंदिर में भोले नाथ के दर्शन के लिए आते हैं।