सुरक्षा अब एक सबसे महत्वपूर्ण मानदंड बन गया है जिसे कोई नई कार खरीदते समय देखता है। और जैसे-जैसे खरीदारों के बीच यह रुझान बढ़ता है, कार निर्माता अपने मॉडलों में अतिरिक्त सेफ्टी फीचर्स (सुरक्षा सुविधाएं) जोड़ रहे हैं। ताकि उन्हें सुरक्षित और खरीदारों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाया जा सके। सरकार भी ओईएम को अपने वाहनों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जबकि खरीदारों को सुरक्षा से लैस कार की अहमियत के बारे में जागरूक कर रही है।
हालांकि सभी कारों में एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स नहीं होंगी। लेकिन उनमें कुछ जरूरी फीचर्स होनी चाहिए। यहां हम आपको उन टॉप-5 सेफ्टी फीचर्स के बारे में बता रहे हैं, जो हर कार में होनी चाहिए।
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एयरबैग
यह सबसे महत्वपूर्ण सेफ्टी फीचर है जो एक कार में होनी चाहिए। हादसे के दौरान एयरबैग ड्राइवर या यात्री के ऊपरी शरीर या सिर को वाहन के अंदरूनी हिस्से से टकराने की संभावना को कम करते हैं। हालांकि कार में कम से कम दो फ्रंट एयरबैग होने चाहिए। लेकिन कम से कम 6 एयरबैग (साइड और कर्टेन सहित) वाले मॉडल को खरीदने की सिफारिश की जाती है। यह भी ध्यान देना चाहिए कि एयरबैग को सीटबेल्ट के साथ काम करने के लिए डिजाइन किया गया हो।
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एबीएस और ईबीडी
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इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक-फोर्स डिस्ट्रीब्यूशन (EBD) के साथ एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS)
कार के अचानक ब्रेक लगाने के दौरान EBD के साथ ABS मदद करता है। जब कोई अचानक भारी बल के साथ ब्रेक लगाता है, तो कार के पहिए लॉक हो जाते हैं और कंट्रोल से बाहर हो जाते हैं। ABS EBD पहियों को लॉक होने और फिसलने से रोकता है। इस तरह अचानक ब्रेक लगाने के दौरान भी बेहतर कंट्रोल सुनिश्चित करता है।
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Electronic Stability Control (ESC)
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इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC)
यह फीचर कार के स्टीयरिंग व्हील के एंगल और उसके व्यक्तिगत पहियों के रोटेशन की निगरानी करता है। आपात स्थिति के दौरान, ESC ब्रेक लगाता है और इंजन के पावर को बैलेंस करके कंट्रोल हासिल करता है। यह उन दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करता है जो मोड़ों में ओवरस्टीयरिंग या अंडरस्टीयरिंग या गीली सड़कों पर कम ट्रैक्शन के मामले में हो सकती हैं।
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TPMS
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टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS)
एक कार के सभी चार टायरों में सटीक हवा का दबाव स्थिरता और बेहतर संचालन के लिए जरूरी है। हालांकि, अक्सर ड्राइवर को तुरंत पता नहीं चलता कि टायर का हवा का दबाव कम हो गया है। एक TPMS सिस्टम यहां काम में आता है। क्योंकि अगर चार में से किसी भी टायर में हवा का दबाव कम है तो यह इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर को अलर्ट भेजता है।
ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन
ब्लाइंड स्पॉट सड़क के वे हिस्से हैं जो विभिन्न कारणों से चालक द्वारा नहीं देखे जा सकते हैं। ये स्पॉट कभी-कभी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं और इस तरह उनकी निगरानी की जरूरत होती है। एक ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन सिस्टम सेंसर का इस्तेमाल करके ड्राइवर को ऐसी कोई भी जानकारी भेजता है, जिससे वाहन और उसके रहने वालों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलती है।