भारत में शराब पीकर गाड़ी चलाने की घटनाएं अक्सर त्योहारों के मौसम में बढ़ जाती है। और इसकी वजह से, हमें दिल्ली के कंझावला मामले जैसी भीषण घटनाएं देखने को मिलती हैं। इससे सवाल उठता है कि क्या भारत में अधिकारियों द्वारा पकड़े जाने और कानून के शिकंजे में कसे जाने का डर इतना कम है कि लोगों नशे की हालत में गाड़ी चलाने और अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालने का दुस्साहस करते हैं।
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Breath Analyser Test Delhi Traffic Police
- फोटो : PTI
2019 में मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन करके शराब पीकर गाड़ी चलाने पर जुर्माना 2,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया था। अब पहली बार अपराध करने पर ड्राइवर को 10,000 रुपये तक का भुगतान करने के लिए कहा जा सकता है और छह महीने तक की जेल भी हो सकती है। दूसरी बार अपराध करने पर जुर्माना 15,000 रुपये तक जा सकता है और जेल की अवधि दो साल तक बढ़ सकती है। जुर्माने में बढ़ोतरी के बावजूद, नशे में धुत चालक कानून को ताक पर रखकर बेहद आसानी से इस जोखिम को मोल लेते नजर आते हैं। शायद यह मानते हुए कि वे सजा से बच जाएंगे।
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Driving
- फोटो : Istock
यह स्थिति दुनिया भर में कमोबेश एक जैसी है और इसके लिए अलग-अलग देशों में अलग-अलग स्तर के दंड का प्रावधान है। ब्रिटेन में, जुर्माना असीमित है और मामले की सुनवाई करने वाले प्रशासन द्वारा तय किया जाता है। स्वीडन में दो साल तक की कैद है और गंभीर मामलों में दो साल या उससे ज्यादा के लिए लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है।
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Drunk Driving
- फोटो : For Reference Only
हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में "इग्निशन इंटरलॉक सिस्टम" नाम की एक नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें नशे की हालत में वाहन चलाने वाले ड्राइवर को पकड़ने के लिए किसी पुलिस वाले की जरूरत नहीं होती है। क्योंकि अगर ड्राइवर नशे में है तो कार स्टार्ट ही नहीं होगी।
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Driver Alcohol Detection System for Safety (DADSS)
- फोटो : For Reference Only
ऑस्ट्रेलिया ब्रेथएनालाइजर के मुताबिक, "इस सिस्टम में आपको अपनी कार चालू करने के लिए सांस का नमूना देना पड़ता है। एक निश्चित मात्रा में शराब की मात्रा आपकी ब्रेथ एनालाइजर (सांस विश्लेषक) यूनिट को आपना वाहन चालू करने की अनुमति देने से रोक सकती है।" इंटरलॉक में एक कैमरा भी शामिल है और इस प्रोग्राम को दरकिनार करने वाले ड्राइवर के जोखिम को कम करने के लिए सांस का नमूना देने वाले व्यक्ति की तस्वीर लेता है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
सड़क सुरक्षा योजना 2021 के विकास के लिए न्यू साउथ वेल्स समुदाय के एक सर्वेक्षण में उत्साहजनक नतीजे सामने आए। इस सर्वे में शामिल लगभग 84 प्रतिशत लोगों ने महसूस किया कि अल्कोहल इंटरलॉक सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थे।
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Drunk Driving
- फोटो : Freepik
शराब पीकर गाड़ी चलाना एक अहम सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है जो न सिर्फ शराब पीने वालों को प्रभावित करती है बल्कि यात्रियों और पैदल चलने वालों जैसे निर्दोष लोगों को भी प्रभावित करती है। जबकि भारत में नशे में गाड़ी चलाने और घातक दुर्घटनाओं के कई मामले सामने आते हैं, पिछले पांच वर्षों में इस प्रवृत्ति में गिरावट आई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, 2017 में नशे में ड्राइविंग के कारण 14,071 दुर्घटनाएं हुईं, जो 2021 में कम होकर 9,150 रह गईं। साथ ही, संबंधित मौतें 2017 में 4,776 से कम होकर 2021 में 3,314 हो गईं। कुल दुर्घटनाओं में शराब पीकर गाड़ी चलाने की हिस्सेदारी भी 2017 के तीन प्रतिशत से कम होकर 2021 में 2.2 प्रतिशत हो गई है।
जबकि कई लोगों को लगता है कि उनके सिस्टम में अल्कोहल के निम्न स्तर के बावजूद कंट्रोल ज्यादा रहता है, लेकिन डब्ल्यूएचओ का कुछ और ही मानना है। डब्ल्यूएचओ का कहना है, "कम ब्लड-अल्कोहल लेवल पर भी, चालक कंसन्ट्रेशन (एकाग्रता), कोऑर्डिनेशन (समन्वय) और सड़क के वातावरण में जोखिमों की पहचान के साथ समस्याओं का अनुभव करते हैं।" इसमें कहा गया है कि किसी दिए गए ब्लड-अल्कोहल लेवल पर, हाई स्पीड या खराब सड़क डिजाइन के होने पर नशे में ड्राइविंग दुर्घटनाएं ज्यादा गंभीर या ज्यादा संख्या में हो सकती हैं।"