भारतीय वाहन बाजार में ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाली कारों की खासी मांग बढ़ गई है। बिना क्लच वाली कारों से सफर आसान लगने लगता हैं। इसके अपने फायदे हैं। ऐसे में वाहन निर्माता अपने नए मॉडल में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का ऑप्शन भी शामिल करने लगे हैं। कंपनियों का दावा है कि ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कारों में माइलेज का नुकसान नहीं होता है। लेकिन मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कारों की बिक्री भी खूब होती है। एक नया चालक कार ड्राइविंग सीखते समय मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कारों को ही तवज्जो देता है। इसके साथ ही इस समय ज्यादातर लोगों के पास मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कारें हैं। मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कारों में आमतौर पर क्लच का खराब हो जाना या उनका जल जाना एक बड़ी समस्या के तौर देखी जाती है। यहां हम आपको आमतौर पर ड्राइविंग के दौरान की जाने वाली उन चार गलतियों के बारे बताएंगे, जिससे कार का क्लच तो जलता ही है। साथ में आपकी कार का माइलेज भी घटने लगता है। इन गलतियों को काबू में करने आप न सिर्फ अपने कार के कल्च प्लेट की उम्र बढ़ा सकते हैं. बल्कि कार की माइलेज भी बढ़ जाएगी और मेनटेनेंस का खर्च भी कम हो जाएगा।
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For Reference Only
- फोटो : सोशल मीडिया
क्लच और एक्सेलरेटर का ज्यादा इस्तेमाल
चढ़ाई के दौरान अक्सर लोग कार का ब्रेक लगाने के बजाय क्लच और एक्सीलरेटर का इस्तेमाल करते हैं। इससे कार का क्लच तेजी से गरम होने लगता है। कई बार तो क्लच खराब भी हो जाता है। ऊंचाई पर क्लच और एक्सेलरेटर का एक साथ ज्यादा इस्तेमाल करने पर क्लच की उम्र पर बुरा असर पड़ता है, जिससे यह जल्दी खराब हो जाता है। दरअसल क्लच कार को पीछे की ओर लुढ़कने से बचाने के लिए ट्रांसमिशन में ज्यादा ताकत ट्रांसफर करता है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है, जिससे क्लच के खराब होने और आग लगने की भी संभावना बढ़ जाती है।
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Car Driving and Car Clutch
- फोटो : For Reference Only
क्लच को जल्दी रिलीज करना
क्लच को रिलीज करना एक कला है जो अनुभव के साथ आती है। दरअसल हर दूसरी कार के क्लच में एक अलग बाइट प्वाइंट होता है। ऐसे में उस बाइट प्वाइंट पर बिना एक्सीलरेटर दिए पहुंचने से कार को झटका लगने लगता है। यह क्लच को गर्म करता है और क्लच को जल्दी से खराब करता है। आसान भाषा में समझें तो क्लच एक प्रेशर प्लेट होता है जो इंजन की पावर को ट्रांसमिशन तक ले जाता है। इंजन चालू होने पर इंजन फ्लाइव्हील हमेशा घूमता रहता है। जब कार रुकी रहती है और क्लच न्यूट्रल में होता है, तो ट्रांसमिशन और इंजन फ्लाइव्हील दोनों आपस में डिस्कनेक्ट हो जाते हैं।
जब पहला गियर लगा होता है और क्लच को धीरे-धीरे छोड़ा जाता है, तो क्लच प्लेट्स जुड़ने लगती हैं, जो बदले में ट्रांसमिशन को मूव करती है और कार आगे बढ़ती है। अगर क्लच को जल्दी से रिलीज कर दिया जाए, तो ट्रांसमिशन, जो स्थिर है, वह विपरीत बल लागू करेगा और क्लच सामान्य इस्तेमाल की तुलना में बहुत जल्दी एक्टिव हो जाएगा। क्लच को जल्दी से रिलीज करना भी ट्रांसमिशन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इससे आग लगने का भी खतरा पैदा हो जाता है।
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Traffic Jam
- फोटो : PTI
ट्रैफिक जाम में क्लच दबाए रखना
भारी ट्रैफिक के दौरान बहुत से लोग हल्के क्लच के साथ गाड़ी को लंबे समय तक चलाते हैं। इससे क्लच पर भारी दबाव पड़ता है। ऐसे में अच्छा होगा कि जब तक आपको पर्याप्त जगह नहीं मिल रहा है अपनी गाड़ी को आगे न बढ़ाएं। इसके अलावा ध्यान दें कि अगर गाड़ी 20 सेकेंड तक आगे नहीं बढ़ने वाली है तो उसे न्यूट्रल पर कर दें। लंबे समय तक क्लच पेडल को दबाए रखने पर क्लच का बॉल बेयरिंग खराब हो सकता है। हालांकि, भले ही बेयरिंग को बदला जा सकता है लेकिन इसके लिए फिर पूरे सेट-अप को बाहर निकालना पड़ेगा। ट्रैफिक में अक्सर इस लापरवाही के कारण लोगों के क्लच जल जाते हैं।
डेड पेडल की तरह इस्तेमाल करना
चालक को यह याद रखना बहुत जरूरी है कि अगर आपकी कार में डेड पेडल नहीं है तो आप कल्च को डेड पेडल न समझें। ज्यादातर कारों में डेड पेडल नहीं मिलता है। इस वजह से कई कार चालक क्लच पर अपने बाएं पैर को आराम के लिए रख देते हैं। यानी वो इसका इस्तेमाल डेड पेडल की तरह करते हैं। लेकिन थोड़े से दबाव के चलते क्लच आंशिक रूप से काम करता रहता है, जिससे कार की माइलेज घटती है। और लंबे समय तक ऐसा करते रहने से क्लच खराब हो जाता है।