लॉकडाउन के दौरान भले ही सड़कों से ट्रैफिक गायब रही हो, लेकिन देश में सड़क दुर्घटनाएं होना बहुत आम बात है। सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ने वाले वाहन, लापरवाही और बिना वजह की जल्दबाजी हादसों को दावत देते हैं। देश में पिछले साल 4.49 लाख सड़क दुर्घटनाओं में से लगभग 71 फीसदी दुर्घटनाएं तेज रफ्तार के कारण हुई थीं। शनिवार को संसद में यह जानकारी दी गई।
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हादसे में क्षतिग्रस्त ऑटो
- फोटो : अमर उजाला
सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री ने वीके सिंह ने एक लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया, "उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले कैलेंडर वर्ष 2019 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की कुल संख्या 4,49,002 है। इनमें से 3,19,028 सड़क दुर्घटनाएं (71.1 फीसदी) ओवर स्पीड की वजह से बताई गई हैं।"
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छत्तसीगढ़ के महासमुंद में सड़क हादसा
- फोटो : ANI
सिंह ने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लोगों में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले के लिए "सांसदों की सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य" को सूचित किया है। मंत्री ने कहा, जिले के लोकसभा सांसद ऐसी समिति के अध्यक्ष होंगे।
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क्षतिग्रस्त कार
- फोटो : अमर उजाला
सिंह ने कहा कि मंत्रालय ने शिक्षा, इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों), प्रवर्तन और आपातकालीन देखभाल के आधार पर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को हल करने के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है।
सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं में कुछ लोग मारे जाते है और इसमें घायल होने वालों की संख्या अधिक हैं, जिनमें से बहुत से लोग अपंग हो रहे हैं। भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक है। जिसमें लगभग 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है और करीब 3 लाख अपाहिज हो जाते हैं।