विवाह मुहूर्त (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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वधू के गुरुबल और वर के सूर्यबल पर विचार जरूरी
वधू की राशि में बृहस्पति यदि द्वितीया, पंचम, सप्तम, नवम और एकादश भाव में हो तो वो शुभ माना जाता है और चतुर्थ, अष्टम, और द्वादश भाव में गुरु होना अशुभ माना जाता है। ठीक इसी प्रकार वर की राशि में यदि सूर्य तृतीय, षष्ठम, दशम और एकादश भाव में हो तो वो शुभ होता हैं इसके अलावा चतुर्थ, अष्टम, द्वादश भाव अशुभ माना जाता है।