GuruPushyamrut Yoga: भारतीय ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र का गुरुवार से योग होने पर यह अति दुर्लभ गुरुपुष्यामृत योग बनता है। इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य नक्षत्र में विवाह व उससे संबंधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं। जब पुष्य नक्षत्र सोमवार, गुरुवार या रविवार को आता है, तो एक विशेष वार नक्षत्र योग निर्मित होता है। जिसका योग सभी प्रकार का शुभफल देता है। गुरुवार को इस नक्षत्र के पड़ने से गुरु पुष्य नामक योग का निर्माण होता है। ऐसा योग बहुत ही काम बनता है। ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र माने गए हैं। इनमें 8 वे स्थान पर पुष्य नक्षत्र आता है। यह बहुत ही शुभ नक्षत्र माना जाता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार यह नक्षत्र स्थायी होता है और इसीलिए इस नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु स्थायी तौर पर सुख समृद्धि देती है। तो आइए जानते हैं गुरुपुष्यामृत योग कब बन रहा है, और गुरु कृपा पाने के मंत्र और सौभाग्य प्राप्ति के उपाय के बारे में-