ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की भूमिका
कुंडली में शनि एवं चन्द्रमा की बलाबल स्थिति के अनुसार कुछ राहत की उम्मीद की जा सकती है। कुंडली में जिस भाव में भी विषयोग बनता है, प्राणी को उस भाव से ही सम्बंधित कष्ट मिलते हैं अथवा उस भाव से सम्बंधित कारकत्व पदार्थों का अभाव रहता है फलितवाचन के समय ऐसा पाया ही गया है। इसका सूक्ष्म विवेचन अष्टक वर्ग के 'द्रेष्काण' में गहनता से किया जाता है जो जातक द्वारा पूर्व के जन्मों में किसी स्त्री को दिये गये कष्ट की ओर संकेत करता है। पुनः वही स्त्री प्रतिशोध लेने के लिए मनुष्य योनि में विषयोग वाले प्राणी की माँ, पत्नी, पुत्री बहन आदि के रूप में आती है।