वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि और राहु ग्रह का विशेष महत्व माना गया है। शनिदेव को जहां न्याय और कर्मफलदाता माना गया है वहीं राहु को एक छाया ग्रह। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर शुभ और अशुभ फल प्रदान करते हैं। शनि और राहु दोनों ही ग्रह बहुत ही मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। शनि जहां करीब ढाई वर्षों के बाद राशि परिवर्तन करते हैं तो वहीं राहु 18 महीने का समय लेते हैं। इस तरह जब शनि या राहु का राशि परिवर्तन और फिर नक्षत्र परिवर्तन करते हैं तो हर एक राशि के जातकों के जीवन पर इसका असर जरूर पड़ता है। शनिदेव इस समय अपनी स्वयं की राशि कुंभ में विराजमान है और बीते 15 मार्च से शनि शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं। शनिदेव 17 अक्तूबर 2023 तक इस राशि में विराजमान रहेंगे। शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं इस तरह से शनि और राहु का संयोग पिछले कई महीनों से बना हुआ है। ऐसे में कुछ दिनों तक कुछ राशि के जातकों को इस संयोग से बचकर रहना होगा।