वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। शनिदेव को न्याय का देवता और व्यक्तियों को कर्म के आधार पर फल देने वाला ग्रह माना गया है। सभी ग्रहों में शनिदेव सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं जिस कारण से जिन जातकों की कुंडली में शनि जिस भाव में बठते हैं या फिर द्दष्टि डालते है उनके फल में धीमापन आ जाता है। शनि ग्रह ही एक मात्र ऐसे ग्रह हैं जो जातकों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव रखते हैं। शनिदेव ढाई वर्षों में राशि परिवर्तन करते हैं। इसके अलावा शनिदेव राशि परिवर्तन के साथ-साथ नक्षत्र परिवर्तन भी करते हैं। आपको बता दें शनि 6 अप्रैल 2024 से गुरु के प्रभाव वाले नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में हैं। शनि अब इसी माह में पूर्वाभाद्रपद के चरण में बदलाव करने वाले हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार न्याय और कर्मफलदाता शनिदेव 18 अगस्त को रात 10 बजकर 3 मिनटपर पूर्वाभाद्रपद के पहले चरण में प्रवेश कर जाएंगे। आइए जानते हैं शनि के पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के पहले चरण में प्रवेश करने पर किन-किन राशियों को इसका लाभ मिलेगा।