Rahu Nakshatra Transit: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह माना जाता है। राहु 18 महीने के बाद अपना राशि परिवर्तन करते हैं और कुंडली में राहु की स्थिति से व्यक्ति के जीवन में तरह-तरह के प्रभाव देखने को मिलते हैं। राहु ऐसे छाया ग्रह हैं जो हमेशा वक्री ही चाल से चलते हैं। आपको बता दें कि राहु इस समय मीन राशि में विराजमान हैं फिर इसके बाद कुंभ राशि में चले जाएंगे। राहु के राशि परिवर्तन करने के साथ-साथ नक्षत्र परिवर्तन भी करते हैं और जल्द ही शनि के स्वामित्व वाले नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद में प्रवेश करने वाले हैं। राहु के शनि के नक्षत्र यानी उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करने का प्रभाव हर एक राशि के जातकों के जीवन पर अवश्य ही पड़ेगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और शनि दोनों का एक साथ होना अच्छा नहीं माना जाता है। लेकिन अगर किसी जातक की कुंडली में शनि की स्थिति शुभ हो तो राहु अच्छे परिणाम देते हैं। आपको बता दें कि राहु 8 जुलाई को सुबह शनि के नक्षत्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में कुछ राशि के जातकों पर इसका विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा।