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23 सितंबर को राहु करेंगे वृषभ राशि में प्रवेश, जानिए कुंडली में इसका शुभ-अशुभ प्रभाव

Sun, 06 Sep 2020 06:07 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
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आपकी जन्मकुंडली के अनुसार राहु किस भाव में बैठे हैं। उनका प्रभाव कैसा रहेगा ! इसका ज्योतिषीय विश्लेषण - फोटो : अमर उजाला
लगभग 18 महीने के बाद राहु मिथुन राशि की यात्रा समाप्त करके वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जहां ये अप्रैल 2022 तक विराजमान रहेंगे उसके बाद मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे। राहु और केतु हमेशा उल्टी गति से चलते हैं इसलिए यह कर्क राशि में जाने की बजाय पीछे चलकर वृषभ राशि में आ रहे हैं। यह राशि इनके गुरु, शुक्र की राशि है इस राशि में भी राहु सर्वाधिक बलवान होते है। 

धार्मिक ग्रंथों में राहु को सर्वदा अपने भक्तों पर वैभव और बाहुल्य प्रदान करने को प्रस्तुत, मित्रवत एवं प्रेम से परिपूर्ण, चंदन पुष्प एवं क्षत्र से सुशोभित नीले रंग में व्यक्त, खड़क और खाल से सुशोभित दक्षिण दिशा की ओर मुंह किए हुए भद्रासन पर आसीन चारों ओर सिद्धियों से घिरे हुए गहरे नीले रंग के राहु हम पर कृपा करें, इस तरह से प्रार्थना की गई है। आपकी जन्मकुंडली के अनुसार राहु किस भाव में बैठे हैं। उनका प्रभाव कैसा रहेगा ! इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
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rahu
विभिन्न भाव में राहु का प्रभाव
प्रथम भाव में राहु- जिन जातकों की जन्म कुंडलियों में राहु लग्न में स्थित हों, ऐसे लोग सूक्ष्म बुद्धि वाले, दूसरों पर शक करने वाले, जासूसी मस्तिष्क के मालिक तथा आज का कार्य कल पर छोड़ने वाले होते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से अस्थमा, पेट तथा वायु विकार होने की संभावना सर्वाधिक रहती है। लग्न भाव में राहु की अच्छी स्थिति के परिणामस्वरूप जातक अपने साहस और पराक्रम से कामयाबियों के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचता है।

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राहु-केतु का राशि परिवर्तन 2020
धन भाव में राहु- इस भाव में राहु की स्थिति भौतिक उपलब्धियों को पूर्ण करने में मदद करती है। मकान तथा वाहन के सुख अवश्य मिलते हैं। ऐसे व्यक्तियों के जीवन में आकस्मिक धन प्राप्ति के योग भी रहते हैं। ऐसे जातक छोटा कार्य व्यापार आरंभ करके सफलताओं के शिखर तक पहुंचते हैं। वाणी दोष के कारण यह भी संभावना बनी रहती है की बोलने में कुछ-कुछ रुकावट आती रहे। परिवार में एकता बनाए रखने के लिए बड़े त्याग करने पड़ते हैं।

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राहु-केतु राशि परिवर्तन 2020
तीसरे भाव में राहु- जिनकी जन्मकुंडली में लग्न से तीसरे भाव में राहु रहते हैं उनके लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने का जिम्मा स्वयं राहु ले लेते हैं और उसमें अदम्य साहस तथा पराक्रम की वृद्धि करते रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों को बाहुबली की संज्ञा दी जाती है जो सर्वसमर्थ रहते हैं और अपने शौर्य की गाथा मनवाने में दूसरों को मजबूर कर देते हैं। भाई बहनों के स्नेह के लिए ये उतने अच्छे नहीं रहते।
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rahu
चतुर्थ भाव में राहु- किसी भी जातक की जन्म कुंडली में यदि राहु चतुर्थ भाव में हो तो उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि हमें जीवन में काफी प्रायश्चित करना पड़ेगा। ऐसे व्यक्ति के मन में हमेशा कुछ न कुछ मंथन चलता ही रहता है जिसके परिणाम स्वरुप उन्हें मानसिक अशांति रहती है। राहु की अच्छी स्थिति जातक को रंक से राजा बना सकती है किंतु माता-पिता के सुख की अल्पता रहती है किसी न किसी कारण से ऐसे लोग घर परिवार से दूर ही रहते हैं।
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rahu ketu
पंचम भाव में राहु- इस भाव में राहु की स्थिति संतान के लिए अनिष्टकारी मानी गई है। उनकी पढ़ाई में रूचि कम रहती है, किंतु क्रियात्मक शक्ति की अधिकता के कारण ऐसे लोग पूर्ण सफल रहते हैं। सामाजिक कार्यों में ऐसे लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और पद प्रतिष्ठा भी प्राप्त करते हैं। इस भाव में राहु की अच्छी स्थिति से व्यक्ति विद्या में प्रखर, तीक्ष्ण बुद्धि वाला, त्वरित निर्णय लेनर वाला और अपनी योजनाओं को सकुशल लागू करने वाला होता है।
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छठे भाव में राहु- किसी भी जातक की जन्म कुंडली में छठे भाव में राहु की स्थिति किसी वरदान से कम नहीं है। ऐसे लोग शत्रुमर्दी होते हैं और किसी भी विषम हालात को पूर्णतः नियंत्रित कर लेने की शक्ति रखते हैं। कुशल प्रशासक तथा कठोर निर्णय लेने के कारण जाने जाते हैं। जातक के सभी अरिष्टों का शमन कर देते हैं। नौकरी अथवा व्यापार के मामले में पूर्णता सफल रहते हैं। कोर्ट कचहरी के मामलों में भी राहु इन्हें विजयश्री दिलाते हैं।

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rahu tample
सातवें भाव में राहु- इस भाव में राहु जातक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव तो डालते ही हैं दांपत्य जीवन में भी अनेकों परेशानियां लाते रहते हैं। जीवन पर्यंत वैचारिक भिन्नता बनी रहती है। कार्य व्यापार की दृष्टि से तो ऐसे लोग पूर्णतः सफल रहते हैं किंतु कई बार देखा गया है कि साझा व्यापार करने में धन हानि का सामना करना पड़ता है। राहु की अच्छी स्थिति के फलस्वरूप ऐसा जातक कुशल नेतृत्व वाला तथा देश विदेश की यात्रा करने वाला होता है।

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राहु
आठवें भाव में राहु- इस भाव में राहु की उपस्थिति जातक के जीवन में पूर्व के जन्मों के किए हुए शुभ-अशुभ कार्यों का संकेत होती है। ऐसा व्यक्ति कहीं भी रहता है उसे षड्यंत्र का शिकार होना ही पड़ता है। स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है और कई असाध्य रोग होने की संभावना निरंतर बनी रहती है। इस भाव में राहु की अच्छी स्थिति के फलस्वरुप ऐसे लोग तांत्रिक सिद्धियां योग और अध्यात्म के क्षेत्र में काफी सफल रहते हैं।

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कुंडली
नवम भाव में राहु- इस भाव में राहु की स्थिति जातक के लिए अति महत्वपूर्ण होती है। यदि राहु अशुभ राशि अथवा शत्रु राशि में हो तो किसी भी कार्य को बिना बाधा डाले होने नहीं देते किंतु अच्छी स्थिति में राहु जातक को अति शक्तिशाली बनाते हैं। जातक देश-विदेश की यात्राएं करता है। विदेशी नागरिकता प्राप्ति के भी योग बने रहते हैं। ऐसे लोग कठोर निर्णय लेने वाले, गूढ़ विद्याओं के जानकार, प्रतिष्ठित तथा कुशल प्रशासक होते हैं।

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कुंडली
दशम भाव में राहु- इस भाव में राहु जातक को अत्यधिक बलवान, कुशल कूटनीतिक और राजनेता के रूप में प्रतिष्ठित करता है। ऐसे व्यक्ति अपने साहसपूर्ण निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। छोटे पद प्राप्त करके भी अपने जीवन के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचते हैं। सामाजिक कार्यों में ऐसे लोग हमेशा ही चढ़कर हिस्सा लेते हैं। आध्यात्मिक क्षेत्र में भी ऐसे लोग सफल रहते हैं। राहु की खराब स्थिति माता-पिता के सुख में कमी लाती है। 

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कुंडली
एकादश स्थान में राहु- इस स्थान में राहु की स्थिति भी जातक के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ये अकेले ही व्यक्ति के सभी अरिष्टों का शमन करते हुए उसे जीवन में सफलताओं के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाते हैं किंतु बड़े भाइयों के सुख में कमी भी लाते हैं। ऐसा जातक अपनी सूझ-बूझ तथा कुशल निर्णय लेने की क्षमता द्वारा कार्य व्यापार की सफलता से अत्यधिक ख्याति प्राप्त करता है। जातक को जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
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कुंडली में राहु
बारहवें स्थान में राहु- इस भाव में राहु का प्रभाव काफी मिलाजुला रहता है। इनकी अच्छी स्थिति के फलस्वरुप जातक अध्यात्म के क्षेत्र में बहुत आगे जाता है। तंत्र-मंत्र की क्रिया एवं सिद्धियों की प्राप्ति में भी काफी सफलता मिलने की संभावना रहती है। यदि राहु की स्थिति अच्छी न हो तो जातक को कठोर संघर्षों का सामना करना पड़ता है। उसे स्वास्थ्य के प्रति भी कुछ ना कुछ लगा ही रहता है। कर्ज में रहने की संभावना बनी रहती है।
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