ग्रहों में युवराज कहे जाने वाले बुध 5 अगस्त की सुबह कर्क राशि में अस्त हो गए हैं। इनका अस्त होना या उदय होना फलित ज्योतिष में बहुत महत्व रखता है क्योंकि, ये बुद्धि एवं व्यापार के प्रमुख ग्रहों में से एक हैं। अतः व्यापार और युवाओं पर इनका सीधा प्रभाव पड़ेगा। मिथुन एवं कन्या राशि के स्वामी बुध, मीन राशि में नीच राशिगत एवं कन्या राशि में उच्चराशि गत संज्ञक हैं। इनके द्वारा निर्मित भद्र योग तथा बुधादित्य योग को सर्वाधिक प्रभावशाली माना गया है। किसी भी ग्रह के अस्त होने का तात्पर्य है उसका तेज हीन हो जाना, प्रभावहीन होना, फलहीन होना। कहने का अर्थ यह है कि वह ग्रह जिस फल को देने वाला होता है उसे पूर्ण रूप से नहीं दे पाता। ग्रहों में वाणी के स्वामी बुध के अस्त होने का सभी 12 राशियों पर कैसा प्रभाव रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।