ग्रहों में सेनापति कहे जाने वाले पृथ्वी पुत्र मंगल 17 अगस्त की शाम 07 बजे सिंह राशि में गोचर करते हुए पश्चिम दिशा में अस्त हो रहे हैं। ये पुनः 29 नवंबर को सुबह 06 बजकर 03 मिनट पर तुला राशि में गोचर काल के समय पूर्व में उदय होंगे। फलित ज्योतिष में किसी भी ग्रह के अस्त होने का अर्थ है उसका पूर्ण प्रभाव पृथ्वी वासियों पर न पड़ना अथवा उस ग्रह के पूर्ण प्रभाव से वंचित रह जाना। अस्त होने का तात्पर्य यह भी है कि उस ग्रह का बुझ जाना, तेज हीन हो जाना, प्रकाश हीन हो जाना। मंगल का बुझ जाना पृथ्वी पर अशांति का संकेत है। जिन जातकों की जन्मकुंडली में ये अशुभ भाव में गोचर कर रहे थे उनके लिए इनका अस्त होना अच्छा ही रहेगा किंतु, जिनकी जन्म कुंडली में शुभ फलदेने वाले भाव में गोचर कर रहे थे उनके लिए इनका अस्त होना अच्छा नहीं कहा जा सकता। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल कर्क राशि में नीचराशि तथा मकरराशि में उच्चराशिगत संज्ञक माने गए हैं। इनके अस्त होने का सभी अन्य राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।