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Guru Transit 2021: गुरु का मकर राशि में हुआ प्रवेश, इन 7 राशियों को होगा फायदा

Wed, 15 Sep 2021 07:18 AM IST
रुस्तम राणा पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
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गुरु का 2021 में राशि परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला
कुंभ राशि में वक्री चल रहे देवगुरू बृहस्पति 14 सितंबर दिन मंगलवार को मकर राशि में व्रकी गति से प्रवेश कर चुके हैं। मकर राशि में गुरु अपनी नीच राशि में होंगे। गुरु मकर राशि में 20 नवंबर तक रहेंगे इसके बाद वह फिर से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। मकर राशि में गुरु का वापस लौटकर आना और शनि के साथ मिलकर चलना सभी राशियों पर प्रभाव डालेगा। गुरु को ज्योतिष की दुनिया में सबसे अधिक लाभकारी ग्रहों में से एक माना जाता है और यह भाग्य और सम्मान प्राप्ति के भी मुख्य कारक माने जाते हैं। देवगुरु का यह गोचर कई नए अवसर लेकर आ सकता है, इस दौरान लोगों के उत्साह में वृद्धि हो सकती है, रुके काम फिर से बन सकते हैं। शिक्षा, यात्रा, प्रकाशन, व्यवसाय आदि में सफलता प्राप्त होने के भी संयोग हैं। हालांकि यह गोचर कुछ लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। यह गोचर कुछ लोगों के लिए बहुत अच्छा और कुछ के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाला है। गुरु मानसिक शक्ति, उत्साह, पेशेवर कौशल और आपकी प्रतिभा को प्रभावित करता है। यह किसी के व्यक्तिगत पेशेवर जीवन को बल देता है। देवगुरु बृहस्पति ग्रह स्थिति के अनुसार सभी 12 राशि के जातकों को अच्छे और बुरे दोनों तरह के परिणाम देते हैं, गुरु का गोचर शनि की युति के साथ होगा इसलिए इस गोचर को ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत ही अनोखा माना जा रहा है क्योंकि इस गोचर का प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। वक्री गुरु के इस गोचर के दौरान कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं हो सकती हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों में भूकंप आने की प्रबल संभावना है। साथ ही राजनीतिक उथल-पुथल होने की भी संभावना है। आइये जानते हैं राशियों पर क्या होगा प्रभाव-
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मेष
मेष राशि के जातकों के लिए, गुरु नौवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं और करियर, नाम और प्रसिद्धि के आपके दसवें भाव में देवगुरू बृहस्पति का वक्री अवस्था में गोचर होगा। इस दौरान व्यापारिक क्षेत्र में आपको सफलता मिलेगी और आपकी योजनाएं भी एक-एक करके पूरी होंगी। नौकरी पेशा लोगों की वेतन वृद्धि की संभावना बन रही है। भविष्य को बेहतर बनाने के लिए नई योजनाओं पर काम करेंगे। परिवार के सदस्यों के साथ जुड़ा हुआ महसूस करेंगे और उनकी जरूरतों का पूरा ध्यान रखेंगे।
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वृषभ
वृषभ राशि के जातकों के लिए गुरु आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं देवगुरू बृहस्पति धर्म, अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं, भाग्य और पिता के साथ संबंध वाले आपके नौवें भाव में वक्री अवस्था में गोचर करेंगे। इस दौरान भाग्य का आपको पूरा साथ मिलेगा। काफी समय से नौकरी में जिस अवसर की तलाश कर रहे थे, वह पूरी होगी। विदेश में नौकरी करने की चाह रखने वालों की इच्छा पूरी होगी लेकिन थोड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है। सामाजिक कार्य करने से आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होगा। आय के कुछ नए स्रोत भी मिल सकते हैं, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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मिथुन
मिथुन राशि के जातकों के लिए गुरु भगवान सातवें और दसवें भाव के स्वामी हैं और आपके गुप्त विज्ञान, वंशानुक्रम और अचानक लाभ / हानि के आठवें घर में इनका वक्री अवस्था में गोचर प्रारंभ हो रहा है इस दौरान व्यवसाय में अच्छा सौदा प्राप्त करेंगे लेकिन थोड़ी बहुत कठिनाई भी आ सकती है। आपको कठिन परिस्थितियों के बारे में आपको स्वयं सचेत रहना होगा और ग्राहकों को भी जरूर जागरूक करना चाहिए |गोचर काल में आर्थिक रूप से सतर्क रहना होगा, इस दौरान न ही किसी से उधार लें और न ही दें। जीवनसाथी के साथ रिश्तों में सावधानी बरतें, किसी भी गलतफहमी से बहसबाजी की स्थिति बन सकती हैं।
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कर्क
कर्क राशि के जातकों के लिए गुरु छठे और नौवें भाव के स्वामी हैं और यह आपके विवाह और साझेदारी के सप्तम भाव में वक्री चाल में गोचर करेंगे इस दौरान ऑफिस में अधिकारियों के साथ आपके संबंध मधुर होंगे और वेतन वृद्धि की भी संभावना बन रही है। व्यवसाय विस्तार के लिए आप जो योजना बना रहे हैं, उसमें कुछ परेशानी आ सकती है लेकिन आपकी योजना सफल होगी। साझेदारी में व्यापार करने वालों को सावधान रहना होगा, किसी भी तरह के विवाद से बचें। जोखिम भरे निवेश से बचकर रहें। परिवार के सदस्यों का पूरा साथ मिलेगा।
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सिंह
सिंह राशि के जातकों के लिए गुरु पंचम और आठवें भाव के स्वामी है। वर्तमान गोचर में यह आपके शत्रु भाव यानि कि षष्ठम भाव में वक्री अवस्था में गोचर करेंगे| इस दौरान आपके मिश्रित परिणाम प्राप्त होंगे। कुछ कार्यों में आपको सफलता मिलेगी तो कुछ कार्यों में अड़चन आ सकती है। कार्यक्षेत्र में चली आ रही परेशानियों को दूर करेंगे और जीवन में स्थिरता लाने का प्रयास करेंगे। रिश्तेदारों के साथ किसी बात पर वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है इसलिए अपने शब्दों का सही से प्रयोग करें। गोचर काल में आर्थिक रूप से स्थिति सही रहेगी और धार्मिक कार्यों में दान भी करेंगे।
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कन्या
कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु चौथे और सातवें घर के स्वामी हैं और प्रेम, रिलेशनशिप और संतान के पांचवें घर में देवगुरू बृहस्पति वक्री स्थिति में गोचर करने जा रहे हैं। इस दौरान कार्यक्षेत्र में कड़ी मेहनत और ईमानदारी से आप सफल होंगे और आपके कार्य की सरहाना भी मिलेगी। साथ ही व्यवसाय के विस्तार के लिए किसी यात्रा पर भी जा सकते हैं। छात्रों के लिए गोचर काल काफी फायदेदमंद साबित होगा, उनकी शिक्षा के क्षेत्र में आ रही अड़चन दूर होगी। निवेश करने के लिए यह समय अच्छा रहेगा, लाभ मिलने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। जीवनसाथी के साथ रिश्ता मजबूत होगा। रिलेशनशिप की गलत फहमी भी दूर होंगी |

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तुला
तुला राशि के जातकों के लिए गुरु तीसरे और छठे घर के स्वामी हैं और माता,सुख और संपत्ति, खुशी के आपके चौथे घर में यह ग्रह गोचर करेंगे। इस दौरान करियर को लेकर गंभीर रहेंगे और आय बढ़ाने पर जोर रहेगा। कारोबारियों को कड़ी मेहनत करनी होगी और उनको अच्छा अवसर प्राप्त होगा। शनि के साथ गुरु की युति स्वास्थ्य संबंधी विषयों में चिंतित कर सकते हैं। अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। संतान के विवाह के लिए अच्छे रिश्ते आ सकते हैं, जिससे आपकी कुछ समस्याएं हल होंगी।

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वृश्चिक
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए गुरु दूसरे और पांचवें भाव के स्वामी है और साहस, भाई-बहन, संचार और छोटी यात्राओं के आपके तृतीय भाव में इनका वक्री अवस्था में गोचर प्रारंभ होने जा रहा है इस दौरान कार्यस्थल पर आपकी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, इसलिए अपने आपको तैयार रखें। करियर में बदलाव की योजना बना रहे हैं तो समय अच्छा है। साथ ही अगर आप विदेश जाना चाहते हैं तो आपको प्रयासों को गति मिलेगी। जो जातक नये व्यवसाय की शुरूआत करना चाहते हैं उनके लिए गोचर काल काफी शुभ रहेगा। हालांकि आपको अपने खर्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि आर्थिक बजट बिगड़ सकता है।

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धनु
धनु राशि के जातकों के लिए, गुरु पहले और चौथे भाव के स्वामी हैं और आपके परिवार, संचार और वाणी के दूसरे घर में देवगुरू का वक्री अवस्था में गोचर होने जा रहा है। इस दौरान पारिवारिक जीवन के लिए धन संचित करने की योजना सफल होगी। धन की बचत के लिए समय अनुकूल है। हालांकि निजी जीवन में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे मानसिक तनाव महसूस कर सकते हैं। व्यावसायिक रूप से यह गोचर अच्छा रहेगा, आपके जीवन में वृद्धि की संभावना है। लक्ष्यों को प्राप्ति के लिए आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी लेकिन सफलता भी मिलेगी।

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मकर
मकर राशि के जातकों के लिए गुरु तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी हैं और आत्मा और व्यक्तित्व के आपके पहले घर में यह वक्री स्थिति में गोचर करने जा रहे हैं। गुरु आपकी राशि के लग्न भाव अर्थात पहले स्थान पर गोचर करने वाले हैं। इस दौरान भौतिकवादी सुखों में कमी का सामना करना पड़ सकता है। यह अवधि आपके अंदर आत्मविश्वास की नई ऊर्जा का संचार करेगी, किंतु निर्णय सोच-समझ कर लें अन्यथा किसी न किसी वजह से परेशानी होती रहेगी। जो लोग शादी करना चाहते हैं, उनको कुछ रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यस्थल का भी माहौल कुछ खास नहीं रहेगा। सहयोगियों और अधिकारियों के साथ अनावश्यक बहस से बचें। साथ ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

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कुंभ
कुंभ राशि वालों के लिए गुरु द्वितीय और एकादश भाव के स्वामी हैं और आपके व्यय, हानि और मोक्ष के द्वादश भाव में यह गोचर करने जा रहे हैं। इस दौरान अनावश्यक खर्चे आपको परेशान कर सकते हैं। साथ ही किसी काम की वजह से परिवार से दूर जाना पड़ सकता है। व्यावसायिक रूप से भी यह ज्यादा शुभ नहीं रहेगा। सफलता प्राप्ति के लिए आपको अधिक मेहनत करनी होगी। नौकरी पेशा जातक अपना कार्य सही से करें अन्यथा नौकरी बदलने में मजबूर किया जा सकता है। गोचर काल में आप अधिक तनावग्रस्त महसूस कर सकते हैं।
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मीन
मीन राशि के जातकों के लिए गुरु दसवें और पहले भाव के स्वामी हैं और लाभ, आय और इच्छाओं के आपके एकादश भाव में इनका वक्री अवस्था में गोचर होगा। इस दौरान आपको शुभ परिणाम प्राप्त होंगे और अतीत में किए गए परिश्रम का भी अच्छा फल मिलेगा। ऑफिस में आपके काम को सराहना मिलेगी और आय के अन्य स्रोतों पर भी काम करेंगे। भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया निवेश आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। गोचर काल में अपना और अपने परिवार के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें और हर रोज व्यायाम और योग करें।
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