शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। शनि न्याय करने वाले ग्रह है। अच्छे कर्म करने वाले जातकों को शनि शुभ फल प्रदान करते हैं जबकि बुरे कर्म करने वाले जातकों पर अपनी तिरछी नजर डालते है। शनि की टेढ़ी नजर पड़ने से उस व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह की परेशानियां आने लगती है। व्यक्ति धीरे-धीरे कंकाल और रोगी होने लगता है। शनि अगर व्यक्ति की कुंडली में उच्च के हो तो वह उसे रंक से राजा बना देते हैं। शनि पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि लग्न भाव में होता है तो सामान्यतः अनुकूल नहीं माना जाता है।