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शनिवार के दिन करें ये उपाय, शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के बुरे प्रभावों से मिलेगी मुक्ति

Sat, 12 Dec 2020 08:28 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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शनि देव बहुत ही धीमी गति से एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते हैं, जिसके कारण शनि की ढैया या साढ़ेसाती लगती है।शनि की वक्र दृष्टि होने या फिर कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव के कारण जातक को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित किया जाता है। इस दिन शनिदेव के उपाय करने और पूजा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। शनि दोष के बुरे प्रभावों से बचने और शनिदेव की कृपा पाने के लिए ज्योतिष में कुछ उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को करने से आप शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। जानते हैं शनि के प्रभावों से मुक्ति पाने के उपाय...
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गाय की पूजा करें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रत्येक शनिवार के दिन काली गाय की सेवा करनी चाहिए। खाना बनाते समय सबसे पहली रोटी गाय को खिलाने के लिए निकालें। गाय के माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं, सींग में मौली बांधे और फिर मोतीचूर के लड्डू खिलाकर उसके चरण स्पर्श करें। इससे आपको शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
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शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए प्रत्येक शनिवार को बंदरों को भुने हुए काले चने खिलाएं। हर शनिवार के दिन मीठी रोटी बनाकर उसपर तेल लगाकर काले कुत्ते को खिलाएं।

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अगर आपके ऊपर शनि की ढैय्या है तो शुक्रवार की रात्रि में 8 सौ ग्राम काले तिल पानी में भिगो कर रख दें। शनिवार को प्रातः काल में उठकर पीसकर लें और उसमें गुड़ मिलाकर 8 लड्डू बनाएं। इन लड्डुओं को किसी काले घोड़े को खिला दें। इस उपाय को लगातार आठ शनिवार तक करें। इससे आपको शनि के दुष्प्रभावोंसे मुक्ति मिलती हैं। 
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यदि आप शनि की साढ़ेसाती से पीड़ित हैं तो शनिवार को सूर्यास्त होने के पश्चात पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक धुप दीप प्रज्वलित करें और मीठ जल चढ़ाएं। उसके बाद वहीं बैठकर क्रमशः हनुमान, भैरव और शनि चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने का बाद पीपल की सात परिक्रमा करें। 
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शनि दोष के दुष्प्रभावो से मुक्ति पाने के लिए प्रत्येक शनिवार सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि करने के पश्चात वट और पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक एवं धुप जलाएं और गाय का शुद्ध कच्चा दूध अर्पित करें।
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जिन लोगों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही हो उन्हें मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। शनि देव अच्छे कर्म करने वालों को शुभ फल प्रदान करते हैं, इसलिए बुरे कर्मों का त्याग कर देना चाहिए। 
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