(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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दूसरों की निंदा करने वाले
गरुड़ पुराण के अनुसार किसी व्यक्ति की निंदा करना पाप के समान होता है। निंदा करने में व्यक्ति बहुत आनंदित महसूस करता है परंतु यह केवल अपने बहूमुल्य समय को नष्ट करना होता है। ऐसे लोग अपने समय को बर्बाद करते हैं और अपने जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते हैं जिसके कारण दुखी होते रहते हैं।